Yes Bank और Axis Trustee Services के बीच **₹8,415 करोड़** के AT-1 बॉन्ड्स को बहाल करने को लेकर तनातनी बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब बैंक पर 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' (Contempt of Court) का खतरा मंडरा रहा है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता है।
कानूनी तनातनी और ताजा अपडेट
Axis Trustee Services ने Yes Bank को चेतावनी दी है कि यदि ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड्स को तत्काल बहाल नहीं किया गया, तो बैंक के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। यह कदम 15 अक्टूबर, 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें कोर्ट ने इन बॉन्ड्स को राइट-डाउन (Write-down) करने के बैंक के पुराने फैसले को खारिज कर दिया था। ट्रस्टी का आरोप है कि बैंक कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
यह विवाद मुख्य रूप से ISIN INE528G08352 और INE528G08394 को स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर दोबारा एक्टिव करने से जुड़ा है। Yes Bank ने 'विलफुल डिसओबेडिएंस' (जानबूझकर आदेश न मानने) के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि वह कानून के दायरे में रहकर इस फैसले के प्रभावों का आकलन कर रहा है।
रिस्क और आगे की राह
निवेशकों को अब बैंक के रुख और कूपन पेमेंट (Coupon Payment) पर नजर रखने की जरूरत है। चूंकि मिड-अक्टूबर में ड्यू हुए कूपन पेमेंट्स पर बैंक पहले ही अपनी डिस्क्रीशन (विवेक) की बात कह चुका है, ऐसे में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। किसी भी तरह का कानूनी नोटिस या रेगुलेटरी हस्तक्षेप शेयर की सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, बैंक द्वारा बॉन्ड्स को टेक्निकल रूप से रिस्टोर करने की प्रक्रिया ही निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगी।
