Yash Innoventures के बोर्ड ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) से **₹10 करोड़** का एक अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) लेने की मंजूरी दे दी है। इस लोन पर **8%** सालाना ब्याज दर लगेगी और इसका इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल (Working Capital) और जनरल कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा। साथ ही, जिग्नेश दवे को इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है।
Yash Innoventures के बोर्ड का बड़ा फैसला
Yash Innoventures लिमिटेड के डायरेक्टर्स बोर्ड ने एक अहम फैसला लेते हुए कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD), मिस्टर ग्नानेश राजेंद्रभाई भगत से ₹10 करोड़ तक का अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) लेने को हरी झंडी दे दी है। इस लोन पर 8% सालाना ब्याज दर तय की गई है।
यह क्यों मायने रखता है?
यह कदम Yash Innoventures को तुरंत फाइनेंशियल लिक्विडिटी (Financial Liquidity) प्रदान करेगा, जिससे कंपनी को अपने ऑपरेशनल खर्चों और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि प्रमोटर से फंड लेना अल्पकालिक जरूरतों को पूरा कर सकता है, लेकिन निवेशकों के लिए कंपनी की समग्र वित्तीय सेहत और कैश फ्लो मैनेजमेंट का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा।
कंपनी को कैसे मिलेगी मदद?
इस मंजूरी के बाद, कंपनी जरूरत के हिसाब से किश्तों में ₹10 करोड़ तक की राशि जुटा सकती है। उम्मीद है कि इस पूंजी निवेश से कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज और रणनीतिक पहलों को सहारा मिलेगा।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को इस बात पर करीब से नजर रखनी चाहिए कि कंपनी इन फंड्स का कितना कुशलता से उपयोग करती है और अपने व्यापक ऋण दायित्वों का प्रबंधन कैसे करती है। प्रमोटर फंडिंग पर लगातार निर्भरता कंपनी के अंदरूनी लिक्विडिटी दबाव का संकेत दे सकती है।
इंटरनल ऑडिटर की भी हुई नियुक्ति
इसके अलावा, मिस्टर जिग्नेश दवे को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कंपनी के इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है, जिससे ऑडिट प्रक्रिया की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
