Wealth First Portfolio Managers ने FY26 में दमदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने प्रॉफिट को **₹34.15 करोड़** से बढ़ाकर **₹38.28 करोड़** तक पहुंचा दिया है। इसके साथ ही, कंपनी अब प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग से बाहर निकलकर एसेट मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसे स्थिर रेवेन्यू मॉडल पर फोकस कर रही है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का लेखा-जोखा
Wealth First Portfolio Managers के लिए FY26 बदलाव का साल रहा। कंपनी का टोटल रेवेन्यू ₹60.07 करोड़ से बढ़कर ₹71.09 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। सबसे बड़ा बदलाव कंपनी के बिजनेस मॉडल में आया है, जहां अब अनिश्चित ट्रेडिंग इनकम की जगह लॉन्ग-टर्म स्टेबल इनकम पर जोर दिया जा रहा है।
नई रणनीतिक दिशा और विस्तार
कंपनी ने अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
- एसेट मैनेजमेंट: Lakshya Asset Management में 69.7% हिस्सेदारी के साथ कंपनी ने SEBI की फाइनल मंजूरी हासिल कर ली है।
- इंश्योरेंस सेक्टर: Wealthshield Insurance Brokers ने अपना IRDAI लाइसेंस प्राप्त कर लिया है और इसके प्रीमियम बुक में साल-दर-साल 30% की ग्रोथ देखी गई है।
- विस्तार: मुंबई में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कंपनी ने Wealth First Advisors Private Limited (WFAPL) का अधिग्रहण शुरू किया है, जिसमें 51% हिस्सेदारी दिसंबर 2026 तक पूरी होगी।
- ग्लोबल रीच: उत्तरी अमेरिका में NRI क्लाइंट्स के लिए नया इंडेक्स-बेस्ड पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) लॉन्च किया गया है।
रिस्क फैक्टर और आगे की राह
हालांकि कंपनी का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को इसके खर्चों पर नजर रखनी चाहिए। नए वर्टिकल्स के लॉन्च के चलते कंपनी का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो बढ़कर 29.9% पर पहुंच गया है। फिलहाल, कंपनी का लक्ष्य अगले 5 सालों में ₹20,000 करोड़ का AUM हासिल करना है, जिसे पूरा करने के लिए नई सब्सिडियरीज का सफल होना बेहद जरूरी है।
