Vedanta Limited ने **₹2,000 करोड़** का फंड जुटाने के लिए अपनी सब्सिडियरी Hindustan Zinc के **50.10%** शेयर गिरवी (Encumber) रखे हैं। यह कदम कंपनी के कर्ज प्रबंधन और भविष्य की रणनीतियों से जुड़ा है।
कर्ज का नया गणित
Vedanta Limited ने ₹2,000 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने के लिए Hindustan Zinc के 211.69 करोड़ शेयर यानी 50.10% हिस्सेदारी को गिरवी रखा है। यह ट्रांजैक्शन एक प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए पूरा किया गया है। कंपनी की इस डील के तहत, कर्ज पूरी तरह चुकाए जाने तक इन शेयरों को बेचना या ट्रांसफर करना प्रतिबंधित होगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
SEBI के नियमों के मुताबिक, प्रमोटर द्वारा शेयर गिरवी रखने की जानकारी देना अनिवार्य है। हालांकि, यह कदम Vedanta की लिक्विडिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक सामान्य प्रक्रिया मानी जा रही है, लेकिन यह कंपनी के भारी कर्ज (Debt) को भी दर्शाता है। Vedanta फिलहाल Hindustan Zinc में 60.71% की हिस्सेदारी रखती है, जो कि इस डील के बाद भी सुरक्षित है, लेकिन प्रमोटर की फ्लेक्सिबिलिटी पर अब कुछ हद तक अंकुश लग गया है।
किन बैंकों का पैसा शामिल?
इस डिबेंचर इश्यू के ट्रस्टी के तौर पर Axis Trustee Services Limited को नियुक्त किया गया है। साथ ही, Barclays Bank PLC, Standard Chartered Bank, Kotak Mahindra Bank और Nippon India, Tata तथा UTI के विभिन्न फंड्स इस कर्ज प्रक्रिया में शामिल प्रमुख लेंडर्स हैं।
