Utkarsh Small Finance Bank के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर (FY26) बेहद निराशाजनक रहा। बैंक ने **₹1,150.98 करोड़** का भारी नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल (FY25) **₹23.70 करोड़** का मुनाफा था। इसकी मुख्य वजह माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बढ़ते दबाव के कारण प्रोविज़न्स (Provisions) का **₹1,562.96 करोड़** तक पहुंच जाना है। बैंक अभी रिवर्स मर्जर (Reverse Merger) की प्रक्रिया से भी गुजर रहा है।
Utkarsh Small Finance Bank को FY26 में ₹1,150.98 करोड़ का नेट लॉस
रेवेन्यू में गिरावट, प्रोविज़न्स में भारी उछाल
Utkarsh Small Finance Bank Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹1,150.98 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस (Net Loss) रिपोर्ट किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के ₹23.70 करोड़ के नेट प्रॉफिट (Net Profit) से एक बड़ा उलटफेर है। इस भारी नुकसान की सबसे बड़ी वजह प्रोविज़न्स (Provisions) और क्रेडिट कॉस्ट्स (Credit Costs) में हुई भारी बढ़ोतरी है, जो FY26 में बढ़कर ₹1,562.96 करोड़ हो गई, जबकि FY25 में यह ₹979.28 करोड़ थी। बैंक का कहना है कि यह माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो (Microfinance Portfolio) में बढ़ते तनाव को देखते हुए उठाया गया एक सक्रिय कदम है।
इस दौरान बैंक का कुल रेवेन्यू (Total Revenue) भी घटकर ₹3,809.75 करोड़ रहा, जो FY25 के ₹4,364.76 करोड़ से कम है। हालांकि, बैंक का डिपॉजिट बेस (Deposit Base) लगभग स्थिर रहा, जिसमें कुल डिपॉजिट FY26 में ₹21,653.98 करोड़ थे, जो FY25 के ₹21,565.70 करोड़ से मामूली रूप से अधिक हैं। लोन पोर्टफोलियो (Loan Portfolio) में भी मामूली गिरावट देखी गई, जो FY26 में ₹19,332.44 करोड़ था, जबकि FY25 में यह ₹19,665.59 करोड़ था।
क्यों मायने रखता है यह नतीजा?
यह नतीजे निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका हैं, क्योंकि बैंक मुनाफे से सीधे नुकसान में आ गया है। प्रोविज़न्स में आई यह भारी उछाल माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में जारी दबाव को दिखाती है, जिसने सीधे बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को प्रभावित किया है। यह स्थिति बैंक के प्रमोटर, Utkarsh CoreInvest Limited, के साथ प्रस्तावित रिवर्स मर्जर (Reverse Merger) के बीच आई है, जो फिलहाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पास विचाराधीन है।
बैंक की रणनीति और भविष्य की राह
Utkarsh Small Finance Bank अपने माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में तनाव को मैनेज करने के लिए लगातार काम कर रहा है। FY26 में की गई प्रोएक्टिव प्रोविज़निंग (Proactive Provisioning) बैलेंस शीट को साफ करने और भविष्य में टिकाऊ ग्रोथ (Sustainable Growth) के लिए तैयारी का हिस्सा है। बैंक अपने बिजनेस मिक्स (Business Mix) में विविधता लाने पर भी जोर दे रहा है, और मार्च 2026 तक माइक्रोफाइनेंस का हिस्सा लोन पोर्टफोलियो का केवल 28% रह गया था।
अब बैंक का फोकस आक्रामक विस्तार (Aggressive Expansion) से हटकर कंसॉलिडेशन (Consolidation) और अपनी फाइनेंशियल पोजीशन (Financial Position) को मजबूत करने पर रहेगा। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को सुधारने, क्रेडिट कॉस्ट्स (Credit Costs) को मैनेज करने और प्रस्तावित रिवर्स मर्जर को सफलतापूर्वक पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। नॉन-माइक्रोबैंकिंग सेगमेंट्स (Non-microbanking segments) में विविधता लाना अहम होगा।
जोखिम और आगे की राह
नेट लॉस और बढ़ी हुई क्रेडिट कॉस्ट्स नतीजों पर असर डालने वाली बड़ी चिंताएं हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बढ़ी हुई भौगोलिक कंसंट्रेशन (Geographic Concentration) एक जोखिम पैदा करती है, खासकर क्षेत्रीय आर्थिक तनाव के दौरान। NCLT द्वारा स्वीकृत रिवर्स मर्जर का नतीजा भी एक महत्वपूर्ण पहलू बना रहेगा।
FY26 के लिए बैंक का 7.71% ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) और 3.29% नेट एनपीए (Net NPA) रेशियो इंडस्ट्री बेंचमार्क्स (Industry Benchmarks) के मुकाबले करीब से निगरानी की मांग करता है। हालांकि, बैंक का प्रोविजन कवरेज रेशियो (Provision Coverage Ratio) 59.31% और CRAR (Capital to Risk-weighted Assets Ratio) 17.71% मजबूत बना हुआ है। FY26 के दौरान बैंक ने ₹950 करोड़ की इक्विटी कैपिटल रेज (Equity Capital Raise) भी की है।
निवेशकों को NCLT में Utkarsh CoreInvest Limited के साथ रिवर्स मर्जर की प्रगति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। बैंक की क्रेडिट कॉस्ट्स को मैनेज करने, कलेक्शन में सुधार करने और लोन पोर्टफोलियो को माइक्रोफाइनेंस से सफलतापूर्वक डाइवर्सिफाई (Diversify) करने की क्षमता भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगी।
