Utkarsh Small Finance Bank ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में **₹1,150.98 करोड़** का भारी नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। पिछले साल जहाँ कंपनी मुनाफे में थी, वहीं इस बार माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बढ़ी चुनौतियों और प्रोविजनिंग (Provisioning) के कारण बड़ा घाटा हुआ है।
Utkarsh Small Finance Bank के नतीजे
31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए Utkarsh Small Finance Bank ने ₹1,150.98 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में बैंक ने ₹23.70 करोड़ का मुनाफा कमाया था। यह एक बड़ा उलटफेर है।
घाटे की वजह क्या है?
बैंक के इस भारी घाटे की मुख्य वजह क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) के लिए प्रोविजनिंग (Provisioning) में भारी बढ़ोतरी है। यह प्रोविजनिंग पिछले साल के मुकाबले 60% बढ़कर ₹1,563 करोड़ हो गई है।
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में बैंक का टोटल रेवेन्यू (Total Revenue) ₹3,809.75 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹4,364.76 करोड़ से कम है। हालांकि, टोटल डिपॉजिट्स (Total Deposits) में मामूली बढ़त देखी गई और यह ₹21,653.98 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹21,565.70 करोड़ था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बड़ा नेट लॉस माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में चल रही स्ट्रक्चरल दिक्कतों को दिखाता है। बैंक ने एहतियात के तौर पर भविष्य में होने वाले संभावित क्रेडिट लॉस (Credit Loss) को कवर करने के लिए प्रोविजनिंग बढ़ाई है। हालांकि इससे शॉर्ट-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा है, लेकिन यह बैंक को भविष्य के लिए मजबूत बनाएगा।
बैंक की रणनीति
Utkarsh Small Finance Bank माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बाहरी दबावों से निपट रहा है। मैनेजमेंट ने इस फाइनेंशियल ईयर को 'एक्सेलरेशन (Acceleration) के बजाय डिसिप्लिन (Discipline)' का साल बताया है। बैंक ने अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स (Underwriting Standards) और पोर्टफोलियो कंसॉलिडेशन (Portfolio Consolidation) पर ध्यान केंद्रित किया है।
अब क्या बदलाव?
मैनेजमेंट अब पोर्टफोलियो की क्वालिटी और रेवेन्यू डाइवर्सिफिकेशन (Revenue Diversification) पर जोर दे रहा है। नॉन-माइक्रोबैंकिंग बिजनेस (Non-microbanking businesses) अब लोन पोर्टफोलियो का 62% हो गया है, जो कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) को कम करने की एक बड़ी स्ट्रैटेजिक शिफ्ट है। बैंक ने ₹950 करोड़ की इक्विटी कैपिटल (Equity Capital) भी सफलतापूर्वक जुटाई है, जिससे कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (Capital Adequacy Ratio) 17.71% हो गया है।
इसके अलावा, बैंक अपने प्रमोटर Utkarsh CoreInvest Limited के साथ मर्जर (Amalgamation) की स्कीम पर भी काम कर रहा है।
जोखिम
हाई नेट लॉस और बढ़ी हुई प्रोविजनिंग अभी चिंता का विषय हैं। माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में चल रहा दबाव, खासकर ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) सेगमेंट में रेगुलेटरी और लीवरेज इश्यूज (Leverage Issues) पर लगातार नजर रखनी होगी।
हालिया आंकड़े
31 मार्च 2026 तक:
- ग्रॉस एनपीए रेश्यो (Gross NPA Ratio) सुधरकर 7.71% हो गया, जो पिछले साल 9.43% था।
- नेट एनपीए रेश्यो (Net NPA Ratio) घटकर 3.29% रह गया, जो पहले 4.84% था।
- बैंकिंग आउटलेट्स (Banking Outlets) की संख्या 1,110 रही।
- टोटल लोन पोर्टफोलियो ₹19,332.44 करोड़ रहा।
आगे क्या देखें?
निवेशक बैंक की डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी को लागू करने, नॉन-माइक्रोबैंकिंग सेगमेंट से रेवेन्यू बढ़ाने और एसेट क्वालिटी में सुधार बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखेंगे। Utkarsh CoreInvest Limited के साथ कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) की प्रगति भी एक अहम फैक्टर होगी।
