United Breweries पर ₹116 करोड़ का टैक्स का खतरा, कंपनी ने नोटिस को दी चुनौती

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AuthorMehul Desai|Published at:
United Breweries पर ₹116 करोड़ का टैक्स का खतरा, कंपनी ने नोटिस को दी चुनौती

United Breweries को पटियाला मार्केट कमेटी से ₹116.25 करोड़ का डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी पर जौ (Barley) की खरीद पर मार्केट फीस और रूरल डेवलपमेंट फंड का भुगतान न करने का आरोप है। कंपनी इस नोटिस को मनमाना और गलत बताते हुए चुनौती दे रही है।

United Breweries पर ₹116.25 करोड़ का टैक्स डिमांड

United Breweries को पटियाला मार्केट कमेटी से एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी को ₹116.25 करोड़ का डिमांड नोटिस मिला है। यह नोटिस जौ (Barley) की खरीद पर कथित तौर पर मार्केट फीस और रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF) का भुगतान न करने के संबंध में है। यह मामला अप्रैल 2020 से मार्च 2026 तक की अवधि के लिए है।

इस कुल डिमांड में ₹9.35 करोड़ मार्केट फीस, ₹93.46 करोड़ पेनल्टी, ₹9.35 करोड़ रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF), और RDF पर ₹4.10 करोड़ का ब्याज शामिल है।

क्यों है यह अहम?

यह विवाद United Breweries के लिए एक बड़ा वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है, अगर कंपनी अपनी कानूनी लड़ाई हार जाती है। ₹116.25 करोड़ की यह कुल राशि कंपनी के फाइनेंस पर असर डाल सकती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जौ की 'डीम्ड' खरीद की व्याख्या आगे चलकर विभिन्न राज्यों में कच्चे माल की खरीद को प्रभावित करने वाले अन्य नियमों के लिए एक मिसाल बन सकती है।

पूरी कहानी

मार्केट कमेटी का असेसमेंट ऑर्डर, जो 1 जुलाई 2026 को मिला, में कहा गया है कि कंपनी ने पटियाला मार्केट एरिया में जौ खरीदा, स्टोर किया और प्रोसेस किया, लेकिन लागू मार्केट फीस और RDF का भुगतान नहीं किया। कमेटी का तर्क है कि पंजाब में बाहर से लाया गया जौ, नोटिफाइड मार्केट एरिया के भीतर ही खरीदा गया माना जाएगा।

अब क्या होगा?

United Breweries इस असेसमेंट ऑर्डर और डिमांड नोटिस को पूरी तरह से चुनौती दे रही है। कंपनी का मैनेजमेंट इस नोटिस को मनमाना, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत मान रहा है। कंपनी अब उचित कानूनी मंच पर अपनी बात रखेगी। निवेशक इस कानूनी लड़ाई के नतीजे पर बारीकी से नजर रखेंगे।

जोखिम क्या हैं?

सबसे बड़ा जोखिम ₹116.25 करोड़ की संभावित वित्तीय देनदारी है, अगर कंपनी कानूनी लड़ाई हार जाती है। एक और अहम बात 'डीम्ड' खरीद की व्याख्या है, जो राज्य की सीमाओं के पार कच्चा माल खरीदने वाली कंपनियों के लिए व्यापक नियामक माहौल को प्रभावित कर सकती है।

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