S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने UCO Bank को 'BBB' इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग दी है। सरकारी सपोर्ट और मजबूत डिपॉजिट बेस को इसकी बड़ी ताकत माना गया है, हालांकि बैंक को **₹2,700 करोड़** जुटाने की योजना के बीच एसेट क्वालिटी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
रेटिंग और सरकार का भरोसा
S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने UCO Bank को BBB लॉन्ग-टर्म और A-2 शॉर्ट-टर्म इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग दी है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, बैंक पर सरकार के मालिकाना हक और फाइनेंशियल इंक्लूजन में इसकी भूमिका के कारण सरकारी सपोर्ट का भरोसा बरकरार है।
पूंजी जुटाने की रणनीति
बैंक ने अपनी फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 2028 तक ₹2,700 करोड़ की नई इक्विटी जुटाने को मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य बैंक के CET1 रेशियो को 15% के ऊपर बनाए रखना है, जो मार्च 2026 तक 16.4% पर था।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
भले ही आउटलुक स्टेबल है, लेकिन एजेंसी ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं:
- लोन ग्रोथ का रिस्क: पिछले पांच सालों में रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME सेक्टर में तेज लोन ग्रोथ हुई है, जिससे पोर्टफोलियो में अनसीजंड लोन बढ़ गए हैं।
- कंसंट्रेशन रिस्क: बैंक के टॉप 20 उधारकर्ताओं का कुल लोन बुक में 16% हिस्सा है, जो जोखिम भरा हो सकता है।
- मुनाफे पर दबाव: बैंक का हिस्टोरिकल रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 0.79% है, जो कि इंडस्ट्री के औसत 1.3% से काफी कम है।
आगे क्या देखें?
अगले दो सालों में NPA रेशियो 2.5% से 3% के बीच रहने का अनुमान है। निवेशकों को बैंक की पूंजी जुटाने की समयसीमा और रिटेल लोन बुक के विस्तार के बीच एसेट क्वालिटी मैनेज करने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए।
