Tata Capital ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए Tata Motors के साथ **₹4,650 करोड़** के ट्रांजेक्शन का प्रस्ताव रखा है। यह रकम कंपनी की तय सीमा (**₹2,577 करोड़**) से ज्यादा होने के कारण अब शेयरहोल्डर्स की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।
ट्रांजेक्शन का विवरण
इस प्रस्ताव का मुख्य हिस्सा फाइनेंसिंग सुविधाओं से जुड़ा है। इसमें टर्म लोन और रिसीवेबल्स के असाइनमेंट के लिए ₹4,100 करोड़ की राशि तय की गई है। इसके अलावा, ₹299 करोड़ फिक्स्ड एसेट खरीदारी के लिए और ₹200 करोड़ ऑपरेटिंग लीज इनकम के लिए आवंटित किए गए हैं।
क्यों जरूरी है वोटिंग?
SEBI के गवर्नेंस नियमों के अनुसार, जब कोई 'Related Party Transaction' कंपनी की तय 'मटेरियलिटी थ्रेशोल्ड' (₹2,577 करोड़) से बाहर निकल जाता है, तो शेयरहोल्डर्स की अनुमति लेना अनिवार्य होता है। कंपनी का कहना है कि ये लेनदेन सामान्य बिजनेस प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें 'आर्म्स लेंथ' आधार पर किया जाएगा ताकि Tata Motors के डीलर और चैनल पार्टनर्स को फाइनेंसिंग मिल सके।
वोटिंग प्रक्रिया
शेयरहोल्डर्स केवल रिमोट ई-वोटिंग के जरिए अपनी राय दे सकते हैं। वोटिंग की प्रक्रिया 6 नवंबर, 2026 को शुरू हो चुकी है और यह 5 दिसंबर, 2026 को शाम 5:00 बजे तक खुली रहेगी। जिन शेयरहोल्डर्स के पास 30 अक्टूबर, 2026 तक शेयर थे, वे ही वोटिंग के लिए पात्र हैं। परिणामों की घोषणा स्क्रूटनी रिपोर्ट जमा होने के बाद की जाएगी।
