Supreme Infrastructure India ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए **₹75 करोड़** तक के नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने की मंजूरी दे दी है। इस योजना की पहली किश्त **₹28 करोड़** की है, जिस पर कंपनी **20%** सालाना ब्याज देगी।
फंडिंग और डील की शर्तें
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कुल ₹75 करोड़ तक फंड जुटाने के लिए हरी झंडी दिखा दी है। इस फंडरेजिंग की पहली किश्त के रूप में ₹28 करोड़ के डिबेंचर्स INRE FUND II को जारी किए जाएंगे। इन डिबेंचर्स का टेन्योर (Tenure) 366 दिन का होगा।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
कंपनी ने इस कर्ज को सुरक्षित करने के लिए भिवंडी (Bhiwandi) स्थित अपनी जमीन को गिरवी (Mortgage) रखा है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, 20% का कूपन रेट काफी ज्यादा है, जो कंपनी की तत्काल पूंजी की जरूरत और जोखिम प्रोफाइल की ओर इशारा करता है। यह कदम कंपनी की एसेट-मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) रणनीति का एक हिस्सा है।
क्या हैं मुख्य जोखिम?
निवेशकों को कंपनी पर बढ़ते ब्याज के बोझ (Interest Burden) पर नजर रखनी चाहिए। इतनी ऊंची दर पर कर्ज लेने से कंपनी के नेट प्रॉफिट और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है। कंपनी की पूरी सफलता इस बात पर टिकी है कि वह भिवंडी वाली जमीन को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से मोनेटाइज कर पाती है।
आगे क्या होगा?
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बाकी बचे ₹47 करोड़ के फंड को कंपनी किस तरह और किन शर्तों पर बाजार से उठाती है। निवेशकों को कंपनी के उन अपडेट्स का इंतजार करना चाहिए जो भिवंडी जमीन के मोनेटाइजेशन और कर्ज कम करने की योजना से जुड़े होंगे।
