Srigee DLM का मुनाफा 37% बढ़ा, पर IPO फंड के इस्तेमाल पर ऑडिटर्स की चिंता

BANKINGFINANCE
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AuthorMehul Desai|Published at:
Srigee DLM का मुनाफा 37% बढ़ा, पर IPO फंड के इस्तेमाल पर ऑडिटर्स की चिंता
Overview

Srigee DLM ने FY26 के लिए **37%** ज्यादा मुनाफा दर्ज किया है, जबकि रेवेन्यू **1.5%** बढ़ा है। हालांकि, ऑडिटर्स ने कुछ बकाया राशियों की पुष्टि न होने और IPO फंड के उम्मीद के मुताबिक इस्तेमाल न होने की ओर इशारा किया है।

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Srigee DLM के नतीजे: मुनाफे में उछाल, पर हैं कुछ सवाल

Srigee DLM ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में 1.5% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹72.305 करोड़ (₹7,230.50 लाख) तक पहुंच गया। वहीं, लगातार जारी ऑपरेशन्स से होने वाले मुनाफे में 37.16% का जबरदस्त उछाल आया है, जो पिछले साल के ₹5.0066 करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹6.8672 करोड़ (₹686.72 लाख) हो गया है।

निवेशकों के लिए अहम क्यों?

मुनाफे में यह बढ़ोतरी शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है, जो कंपनी की बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रेवेन्यू ग्रोथ को दर्शाती है। लेकिन, ऑडिटर की रिपोर्ट में कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं जिन पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए। ऑडिटर ने 'Emphasis of Matter' के तहत ट्रेड रिसीवेबल्स, पेयबल्स और लोंस में कुछ बकाया राशियों की पुष्टि न होने की ओर इशारा किया है, जो अकाउंटिंग में कुछ अनिश्चितताएं दर्शा सकती हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि IPO से मिले पैसों का इस्तेमाल प्रॉस्पेक्टस में बताए गए उद्देश्यों के अनुसार पूरी तरह से नहीं हुआ है।

IPO फंड का क्या हुआ?

Srigee DLM ने IPO के जरिए फंड जुटाए थे। प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, इन फंड का इस्तेमाल एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने और प्लांट व मशीनरी खरीदने जैसे कामों के लिए होना था। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी ने उठाए गए ₹1,697.65 लाख में से केवल ₹665.52 लाख का ही इस्तेमाल किया था।

आगे क्या?

लगभग ₹1.18 करोड़ का IPO फंड मौजूदा प्लांट के लिए मशीनरी खरीदने में इस्तेमाल हुआ, जबकि योजना एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए थी। इसके अलावा, नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए रखे गए ₹186.54 लाख अभी भी इस्तेमाल नहीं हुए हैं। कंपनी के पास कुल ₹1,032.13 लाख (₹10.32 करोड़) के IPO फंड अभी भी अप्रयुक्त हैं।

जोखिम:

मुख्य जोखिम यह है कि बकाए राशियों की पुष्टि न होने से अकाउंटिंग में गलतियां हो सकती हैं और IPO फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। अगर रिसीवेबल्स और पेयबल्स में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो यह कंपनी की वित्तीय सेहत को प्रभावित कर सकता है। IPO फंड का गलत इस्तेमाल भविष्य की विस्तार योजनाओं पर भी असर डाल सकता है।

महत्वपूर्ण आंकड़े:

31 मार्च 2026 तक IPO फंड का इस्तेमाल:

  • मैन्युफैक्चरिंग सेट (R11A): ₹542.78 लाख में से ₹356.24 लाख इस्तेमाल हुए।
  • प्लांट और मशीनरी की खरीद: ₹951.00 लाख में से ₹118.00 लाख इस्तेमाल हुए।
  • जनरल पर्पस: ₹49.85 लाख में से ₹49.85 लाख इस्तेमाल हुए।
  • IPO और इश्यू से जुड़े खर्चे: ₹154.02 लाख में से ₹141.43 लाख इस्तेमाल हुए।
  • कुल अप्रयुक्त राशि: ₹1,032.13 करोड़

वित्तीय वर्ष 26 बनाम 25:

  • रेवेन्यू: ₹72.305 करोड़ बनाम ₹71.2339 करोड़ (+1.5%)
  • कंटिन्यूइंग ऑप्स से प्रॉफिट: ₹6.8672 करोड़ बनाम ₹5.0066 करोड़ (+37.16%)
  • बेसिक ईपीएस (EPS): ₹11.50 बनाम ₹11.76 (-2.21%)

आगे क्या देखें:

निवेशकों को मैनेजमेंट से IPO फंड के पुन: आवंटन और अप्रयुक्त ₹10.32 करोड़ के उपयोग की योजनाओं पर स्पष्टीकरण का इंतजार करना चाहिए। साथ ही, अगले वित्तीय रिपोर्टिंग साइकिल में बकाए राशियों के मिलान पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.