Shriram Finance ने FY 2025-26 के लिए **₹9,998 करोड़** का शानदार प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है। कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर **₹302,274 करोड़** हो गया है। इस बीच, MUFG बैंक ने **20%** की हिस्सेदारी खरीदी है, जिससे कंपनी की पूंजी मजबूत हुई है।
Shriram Finance ने FY 2025-26 में दर्ज किया ₹9,998 करोड़ का मुनाफा
Shriram Finance ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹9,998 करोड़ रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹9,761 करोड़ से थोड़ा ज्यादा है। वहीं, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 14.85% का जोरदार इजाफा हुआ और यह ₹302,274 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी ने 20.40% के मजबूत कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) और 8.38% के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को बनाए रखा है।
MUFG बैंक की 20% हिस्सेदारी
इन नतीजों के बीच एक बड़ी खबर यह भी है कि MUFG बैंक ने Shriram Finance में 20% की हिस्सेदारी हासिल कर ली है। यह हिस्सा ₹39,617.98 करोड़ की बड़ी रकम पर इक्विटी शेयर्स के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए लिया गया है। इस स्ट्रैटेजिक डील से कंपनी की पूंजी और मजबूत होगी।
डिविडेंड का ऐलान
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने प्रति इक्विटी शेयर ₹6 का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है। इससे पहले ₹4.80 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड भी बांटा जा चुका है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
Shriram Finance का यह प्रदर्शन कंपनी की लगातार ग्रोथ को दिखाता है। MUFG बैंक का यह बड़ा निवेश कंपनी के भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा जताता है और इससे कंपनी को आगे के विस्तार के लिए अच्छी खासी पूंजी मिलेगी।
कंपनी की बैकस्टोरी
Shriram Finance रिटेल फाइनेंसिंग, खासकर व्हीकल और MSME लोन में एक जाना-माना नाम है। कंपनी की AUM में लगातार बढ़ोतरी इसके मजबूत मार्केट पैठ को दर्शाती है। MUFG बैंक जैसे ग्लोबल खिलाड़ी के साथ पार्टनरशिप कंपनी के लिए एक नया अध्याय है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अनुभव और पूंजी का लाभ मिलेगा।
आगे क्या बदलाव?
MUFG बैंक के साथ इस स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप से Shriram Finance की पूंजी मजबूत होगी, जिससे उसे बेहतर शर्तों पर फंड जुटाने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनी अपने मौजूदा बिजनेस को और बढ़ा सकती है और ग्रीन फाइनेंसिंग जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम रख सकती है।
जोखिम पर नजर
मैनेजमेंट ने चेतावनी दी है कि अगर इकोनॉमिक माहौल कमजोर होता है, तो रिटेल कर्जदारों, खासकर साइक्लिकल या इनकम-सेंसिटिव सेक्टरों में, को रिपेमेंट में दिक्कत आ सकती है। इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव भी एक चिंता का विषय बना रहेगा, जो NIM को प्रभावित कर सकता है अगर लैंडिंग यील्ड्स बढ़ती फंडिंग कॉस्ट के साथ तालमेल न बिठा पाएं।
आगे क्या देखना है?
निवेशक अब MUFG पार्टनरशिप का Shriram Finance की ग्रोथ स्ट्रेटेजी और फंडिंग कॉस्ट पर असर देखना चाहेंगे। साथ ही, एसेट क्वालिटी (खासकर NPA लेवल) और इंटरेस्ट रेट के उतार-चढ़ाव के बीच NIM को मैनेज करने की कंपनी की क्षमता पर भी नजर रखी जाएगी।
