Shree Securities Limited ने अपनी **33वीं** AGM में **7** अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें शेयर कैपिटल रिडक्शन और **FPI/FII** होल्डिंग लिमिट को **49%** तक बढ़ाना शामिल है।
बड़े बदलावों की तैयारी
29 सितंबर, 2026 को आयोजित हुई कंपनी की 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में मैनेजमेंट ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने न केवल शेयर कैपिटल को रिड्यूस और कंसोलिडेट करने का फैसला किया है, बल्कि विदेशी निवेश की राह को भी आसान बना दिया है। इसके अलावा, कंपनी ने उदय शर्दुल कच्छी (Udayan Shardul Kachchhy) को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया है।
क्यों अहम है यह फैसला?
FPI/FII लिमिट को 49% तक बढ़ाना कंपनी के लिए विदेशी संस्थागत निवेश (Foreign Institutional Investment) के द्वार खोलने जैसा है। जानकारों का मानना है कि इक्विटी स्ट्रक्चर को ऑप्टिमाइज करने के लिए यह कदम उठाना एक बड़े फाइनेंशियल बदलाव का संकेत हो सकता है।
मैनेजमेंट को मिली नई 'पावर'
कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 185 और 186 के तहत मिले नए अधिकारों के साथ, मैनेजमेंट अब इंटर-कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट, लोन देने और गारंटी प्रदान करने में कहीं अधिक लचीलापन दिखा सकेगा। यह फैसला कंपनी की लिक्विडिटी और भविष्य के विस्तार के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अब निवेशकों की नजर कहां हो?
इन्वेस्टर्स को अब कंपनी की तरफ से आने वाली अगली रेगुलेटरी फाइलिंग का इंतज़ार करना चाहिए, जिसमें कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया और समय-सीमा (Timeline) का खुलासा किया जाएगा। साथ ही, विदेशी शेयरहोल्डिंग पैटर्न में होने वाले बदलाव भी कंपनी की ग्रोथ की दिशा तय करेंगे।
