Shree Rajeshwaranand Paper Mills के शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर आई है। कंपनी के बोर्ड ने ₹12 करोड़ के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) को मंजूरी दे दी है। यह कदम NCLT (National Company Law Tribunal) द्वारा मंजूर किए गए रिजॉल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को लागू करने का हिस्सा है, जिसके कारण मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी काफी कम हो जाएगी और रेजोल्यूशन एप्लीकेंट (Resolution Applicant) का कंपनी पर 95% नियंत्रण हो जाएगा।
क्या हुआ है?
Shree Rajeshwaranand Paper Mills Ltd के बोर्ड ने 21 अगस्त, 2026 को हुई एक मीटिंग में 1,20,00,000 इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दी है। यह अलॉटमेंट कुल ₹12 करोड़ का है, जिसमें हर शेयर का फेस वैल्यू ₹10 है। यह कदम NCLT, अहमदाबाद द्वारा स्वीकृत रिजॉल्यूशन प्लान को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे पहले, कंपनी के बोर्ड ने 10 जुलाई, 2025 को ही इक्विटी इनफ्यूजन और रीस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
इस प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट से कंपनी की शेयर होल्डिंग संरचना में बड़ा बदलाव आएगा। अलॉटमेंट के बाद, मौजूदा शेयरधारकों के पास कंपनी में सिर्फ 5% हिस्सेदारी बचेगी, जबकि रेजोल्यूशन एप्लीकेंट (RA) और उससे जुड़े लोग 95% के मालिक बन जाएंगे। साफ है कि इससे मौजूदा निवेशकों के मालिकाना हक में भारी कमी आएगी।
इसकी पृष्ठभूमि क्या है?
कंपनी फिलहाल कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही थी। NCLT, अहमदाबाद ने 27 नवंबर, 2024 को इसके रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी, जिसकी सर्टिफाइड कॉपी कंपनी को 29 नवंबर, 2024 को मिली थी। यह मौजूदा अलॉटमेंट उसी NCLT के आदेश का सीधा नतीजा है।
अब क्या बदलेगा?
इस प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के बाद Shree Rajeshwaranand Paper Mills Ltd का कंट्रोल और मालिकाना हक काफी हद तक बदल जाएगा। प्रतीक काकड़िया सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक होंगे, जिन्हें 65,00,000 शेयर (अलॉटमेंट के बाद की कुल पूंजी का 51.35%) मिलेंगे। वहीं, रामजीभाई काकड़िया के पास 38,13,810 शेयर (कुल पूंजी का 30.13%) होंगे। कंपनी नए शेयरों की लिस्टिंग के लिए BSE लिमिटेड से भी मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है।
जोखिम क्या हैं?
मौजूदा शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम अपनी हिस्सेदारी का गंभीर रूप से कम होना है। रेजोल्यूशन एप्लीकेंट के हाथ में कंट्रोल आने से कंपनी की रणनीतियों और मैनेजमेंट में भी बदलाव आ सकते हैं। निवेशकों को स्टॉक एक्सचेंज से लिस्टिंग की मंजूरी और अलॉटमेंट प्रक्रिया के पूरा होने पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को BSE लिमिटेड से नए शेयरों की लिस्टिंग के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने का इंतजार करना चाहिए। इसके अलावा, शेयर अलॉटमेंट का औपचारिक पूरा होना और नए मैनेजमेंट के तहत कंपनी की भविष्य की योजनाओं से जुड़े किसी भी बड़े ऐलान पर नजर रखना अहम होगा।
