Shivom Investment Share Price: इंसॉल्वेंसी के बीच रेवेन्यू में 95% की भारी गिरावट, नेट लॉस हुआ कम

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AuthorNeha Patil|Published at:
Shivom Investment Share Price: इंसॉल्वेंसी के बीच रेवेन्यू में 95% की भारी गिरावट, नेट लॉस हुआ कम

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Shivom Investment & Consultancy Ltd ने FY24 के लिए अपने वित्तीय नतीजों का ऐलान किया है, जिसमें कंपनी के रेवेन्यू में 95.27% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, नेट लॉस (Net Loss) में कमी आई है। कंपनी अभी इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुज़र रही है और अपना NBFC लाइसेंस भी सरेंडर कर चुकी है।

95% गिरी Shivom Investment की कमाई

Shivom Investment & Consultancy Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2023-24 (FY24) के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में पिछले साल के ₹3.5018 करोड़ की तुलना में 95.27% की भारी गिरावट आई है, जो घटकर सिर्फ ₹0.1655 करोड़ (यानी ₹16.55 लाख) रह गया है।

नेट लॉस में आई कमी, पर चिंताएं बरकरार

कंपनी ने FY24 में ₹0.4862 करोड़ (₹48.62 लाख) का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY23) के ₹49.007 करोड़ के भारी-भरकम लॉस की तुलना में काफी कम है। यह एक तरह से कंपनी के लिए राहत की बात है।

क्या हुआ कंपनी के साथ?

Shivom Investment & Consultancy Ltd अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। इस वजह से कंपनी का बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कंपनी ने अपना नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) रजिस्ट्रेशन भी सरेंडर कर दिया है, जिसका मतलब है कि वह अब पुराने बिजनेस ऑपरेशंस को जारी नहीं रखेगी।

क्यों है ये बड़ी खबर?

रेवेन्यू में आई यह भारी गिरावट सीधे तौर पर इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही का नतीजा है। NBFC लाइसेंस सरेंडर करने से कंपनी के बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव का संकेत मिलता है। लॉस कम होना अच्छी खबर है, लेकिन ऑडिटर की तरफ से कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स (Internal Controls) और वित्तीय रिकॉर्ड्स की विश्वसनीयता पर उठाए गए सवाल गंभीर चिंता का विषय हैं।

आगे क्या?

कंपनी अब अप्रूव्ड रेज़ोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को लागू करने के फेज में है, और नई मैनेजमेंट ने कमान संभाल ली है। कंपनी के लिए आगे चलकर नए बिजनेस मॉडल को स्थिर करना और ऑडिटर द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करना महत्वपूर्ण होगा।

जोखिम (Risks)

ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय नियंत्रणों में बड़ी कमजोरियों का जिक्र किया है। साथ ही, मौजूदा मैनेजमेंट के पास पुराने अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स तक पूरी पहुंच नहीं है, जिससे वित्तीय नतीजों की सटीकता पर सवाल उठता है।

अहम वित्तीय आंकड़े (31 मार्च, 2024 तक)

  • लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग्स (Long-term Borrowings): ₹30.025 करोड़
  • कैश और कैश इक्विवेलेंट्स (Cash & Cash Equivalents): ₹0.0013 करोड़ (पिछले साल ₹5.1459 करोड़ से भारी गिरावट)
  • शेयर कैपिटल (Share Capital): ₹69.9513 करोड़

आगे क्या देखें?

निवेशकों को कंपनी के रेगुलेटरी फाइलिंग्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। रेज़ोल्यूशन प्लान का इम्प्लीमेंटेशन, नए बिजनेस मॉडल का स्थिरीकरण और ऑडिटर की चिंताओं का समाधान, ये कुछ अहम बातें होंगी जिन पर आगे चलकर फोकस रहेगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.