Shivom Investment & Consultancy ने NCLT की मंजूरी के बाद आधिकारिक तौर पर अपनी इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया पूरी कर ली है। कंपनी ने FY25 में **₹3.70 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले नुकसान से एक बड़ा टर्नअराउंड है। हालांकि, निवेशकों को **1:1,000** के शेयर कंसोलिडेशन और प्रमोटर ग्रुप को नए शेयर जारी करने जैसे बड़े बदलावों पर नजर रखनी होगी।
मुनाफे में वापसी और वित्तीय आंकड़े
कंपनी ने FY25 के लिए ₹3.84 करोड़ का रेवेन्यू और ₹3.70 करोड़ का नेट प्रॉफिट पेश किया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल कंपनी को ₹0.49 करोड़ का घाटा हुआ था। वहीं, Q1 FY26 में कंपनी ने ₹0.85 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹0.79 करोड़ का प्रॉफिट कमाया है।
बड़े बदलाव और कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग
नया मैनेजमेंट अब कंपनी की कमान संभाल रहा है। NCLT के रेजोल्यूशन प्लान के तहत कंपनी के पुराने इक्विटी शेयर कैंसिल कर दिए गए हैं। अब पब्लिक शेयरहोल्डर्स को हर 1,000 पुराने शेयरों के बदले 1 नया शेयर दिया जाएगा। इसके अलावा, प्रमोटर ग्रुप को 60 लाख नए शेयर अलॉट किए जा रहे हैं और अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स को ₹21.46 करोड़ के CCDs (Compulsorily Convertible Debentures) जारी किए गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to watch)
फिलहाल स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग सस्पेंडेड है। कंपनी ने 16 अप्रैल, 2025 को इसे बहाल करने के लिए आवेदन दिया था, जिस पर फैसला अभी पेंडिंग है। चूंकि नए शेयरों को अभी तक ISIN नहीं मिला है, ये फिजिकल फॉर्म में हैं, जिससे लिक्विडिटी की बड़ी समस्या बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को BSE के फैसले का इंतजार करना होगा। जब तक ट्रेडिंग पर से सस्पेंशन नहीं हटता, तब तक शेयर बेचना मुमकिन नहीं होगा। इसके साथ ही, भविष्य में CCDs के इक्विटी में कन्वर्जन से शेयर डाइल्यूशन की स्थिति भी बन सकती है।
