SP Capital Financing Ltd ने अपने शेयरहोल्डर्स से Pride Hotels Limited से **₹95 करोड़** का लोन लेने और कंपनी की उधार लेने की सीमा को बढ़ाकर **₹200 करोड़** करने की मंजूरी मांगी है। कंपनी ने इस रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन (Related Party Transaction) की वजह वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी बताई है।
SP Capital Financing ने मांगी शेयरहोल्डर्स से मंजूरी
SP Capital Financing Ltd शेयरहोल्डर्स से दो बड़े वित्तीय प्रस्तावों के लिए अप्रूवल लेने की तैयारी में है। कंपनी सबसे पहले Pride Hotels Limited (एक रिलेटेड पार्टी) से ₹95 करोड़ का अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) लेना चाहती है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक के लिए होगा। इस लोन पर 6.00% सालाना ब्याज लगेगा। इसके साथ ही, कंपनी अपने टोटल उधार लेने की पावर को कंपनीज़ एक्ट, 2013 के सेक्शन 180(1)(c) के तहत बढ़ाकर ₹200 करोड़ करना चाहती है, जिसमें टेंपरेरी बोरिंग शामिल नहीं है। इस पोस्टल बैलट (Postal Ballot) पर 7 जुलाई 2026 से 5 अगस्त 2026 तक वोटिंग होगी।
क्यों है ये अहम?
ये प्रपोजल कंपनी की फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी के लिए काफी मायने रखते हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि Pride Hotels जैसे रिलेटेड पार्टी से फंड लेना, इंस्टीट्यूशनल लोंस की तुलना में ज्यादा फ्लेक्सिबल है और इसमें स्ट्रिक्ट कंडीशंस (Restrictive Covenants) नहीं होतीं। इससे कंपनी को वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इससे प्रमोटर ग्रुप के बीच फाइनेंशियल टाइज और भी मजबूत होंगे।
बैकग्राउंड क्या है?
लोन देने वाली Pride Hotels Limited का फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में टर्नओवर ₹305.62 करोड़ और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹91.20 करोड़ रहा था। इसी अवधि में कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) ₹656.97 करोड़ था। दूसरी ओर, SP Capital Financing की मौजूदा फाइनेंशियल हेल्थ चिंताजनक है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 20.28 और डेट सर्विस कवरेज रेश्यो (DSCR) मात्र 0.03 है। प्रपोज्ड ट्रांजेक्शन के बाद, प्रोफॉर्मा एनालिसिस (Proforma Analysis) के अनुसार, डेट-टू-इक्विटी रेश्यो मामूली बढ़कर 20.44 हो जाएगा और DSCR घटकर 0.029 रह जाएगा।
क्या बदलेगा?
अगर शेयरहोल्डर्स इन प्रपोजल्स को मंजूरी देते हैं, तो कंपनी को रिलेटेड पार्टी लोन से ₹95 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे और उसकी ओवरऑल बोरिंग कैपेसिटी बढ़कर ₹200 करोड़ हो जाएगी। इससे कंपनी को जरूरी लिक्विडिटी (Liquidity) मिल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि कंपनी का डेट का बोझ बढ़ेगा और मौजूदा ऑब्लिगेशन्स को पूरा करने में चुनौती आ सकती है।
क्या हैं खतरे?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता कंपनी का पहले से ही हाई लिवरेज (High Leverage) है, जो 20 से ऊपर के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो से जाहिर है। 0.03 का बेहद कम DSCR बताता है कि डेट चुकाने में कंपनी के पास बहुत कम मार्जिन है। ऐसे में, बिजनेस में कोई भी मंदी या कैश फ्लो जनरेट करने में असमर्थता बड़े रिस्क पैदा कर सकती है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को पोस्टल बैलट के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इसके बाद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उधार लिए गए फंड का इस्तेमाल कैसे होता है और कंपनी अपने हाई लिवरेज व लो DSCR के बीच डेट सर्विसिंग को कैसे मैनेज करती है।
