Reliance Communications और अनिल अंबानी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने कंपनी और उसके पूर्व प्रमोटर को 'Wilful Defaulter' यानी जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाला घोषित कर दिया है। कंपनी ने हालांकि दावा किया है कि इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के चलते ऑपरेशंस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
बैंक का सख्त रुख
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 'रिव्यू कमेटी फॉर विलफुल डिफॉल्टर्स' ने Reliance Communications Ltd और अनिल धीरूभाई अंबानी द्वारा दी गई दलीलों को खारिज कर दिया है। अब बैंक इस कंपनी का नाम क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को भेजने की तैयारी कर रहा है, जिससे उन्हें आधिकारिक तौर पर 'Wilful Defaulter' की सूची में डाल दिया जाएगा।
कंपनी का क्या कहना है?
Reliance Communications का कहना है कि यह क्लासिफिकेशन उनके ऑपरेशंस पर असर नहीं डालेगा। कंपनी का पक्ष मुख्य रूप से दो कानूनी आधारों पर टिका है:
- Section 32A: यह कानून रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होने के बाद पुरानी देनदारियों से इम्युनिटी (Immunity) देता है।
- Section 14(1)(a): यह कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौरान कानूनी कार्यवाही पर रोक (Moratorium) लगाता है।
निवेशकों के लिए जोखिम
भले ही कंपनी खुद को कानूनी तौर पर सुरक्षित मान रही है, लेकिन एक प्रमुख बैंक द्वारा इस तरह का 'टैग' मिलना गवर्नेंस के लिहाज से एक बड़ा झटका है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अब अदालतें यह तय करेंगी कि 'Wilful Defaulter' का दर्जा और IBC का 'क्लिन स्लेट' (Clean Slate) सिद्धांत एक-दूसरे के साथ कैसे काम करेंगे। निवेशकों को अब NCLT की अगली सुनवाई और क्रेडिटर्स कमेटी के फैसलों पर नजर रखनी चाहिए।
