Rikhav Securities का FY26 का मुनाफा ₹18.96 करोड़
वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के लिए Rikhav Securities Limited ने ₹1,991 करोड़ की कुल आय (Total Income) पर ₹18.96 करोड़ का नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है। कंपनी के प्रमुख वित्तीय आंकड़े इस प्रकार हैं: EBITDA ₹32.53 करोड़ और अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹4.95 रहा।
FY26 की दूसरी छमाही (H2 FY26) में, कंपनी की कुल आय ₹1,604 करोड़ रही, जबकि नेट प्रॉफिट ₹1.20 करोड़ और EPS ₹0.31 दर्ज किया गया।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
कंपनी के नतीजों पर पुराने कैश निवेशों (Cash Investments) में हुए घाटे, डेप्रिसिएशन (Depreciation) और टैक्स एडजस्टमेंट्स (Tax Adjustments) का असर साफ दिख रहा है। हालांकि, Rikhav Securities टेक्नोलॉजी में सक्रिय रूप से निवेश कर रही है। FY26 में ₹5.40 करोड़ का निवेश किया गया है, जो पिछले दो सालों में कुल ₹7.5-10 करोड़ के निवेश को और बढ़ाता है। इस टेक्नोलॉजी फोकस का उद्देश्य ऑपरेशनल स्केलेबिलिटी (Operational Scalability) और भविष्य के विकास को बढ़ावा देना है। कंपनी ने H2 FY26 में 2,500 नए ग्राहक भी जोड़े, जिससे सक्रिय ग्राहकों की संख्या बढ़कर 12,500 हो गई है।
पूरी कहानी
Rikhav Securities बाजार की अस्थिरता (Volatility) और SEBI के नए नियमों जैसे रेगुलेटरी बदलावों के बीच काम कर रही है। कंपनी रणनीतिक रूप से स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) में अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है और बड़े संस्थागत ग्राहकों (Institutional Clients) को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। Kotak Mutual Fund, Bank of India और RBL Bank जैसे प्रमुख संस्थागत ग्राहकों को जोड़ने से कंपनी को स्थिर राजस्व धाराओं (Stable Revenue Streams) की ओर बढ़ने का संकेत मिलता है।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी आगामी वित्तीय वर्ष, FY27 के लिए ब्रोकरेज रेवेन्यू (Brokerage Revenue) में 20% की वृद्धि का लक्ष्य रख रही है। यह अनुमान मैनेजमेंट के संस्थागत व्यवसाय और तकनीकी उन्नति की ओर रणनीतिक बदलावों में विश्वास को दर्शाता है। डिजिटल रूप से ग्राहक अधिग्रहण लागत (CAC) ₹60-70 प्रति खाता है, और उचित परिश्रम (Due Diligence) सहित कुल मिलाकर लगभग ₹500 है।
जोखिम
एक महत्वपूर्ण चिंता पुराने कैश मार्केट निवेशों से ₹20-23 करोड़ का रिपोर्ट किया गया घाटा है, जिसने सीधे बॉटम लाइन (Bottom Line) को प्रभावित किया। निवेशकों को विकसित हो रहे SEBI नियमों के अनुकूल ढलने और बाजार की अस्थिरता से निपटने की कंपनी की क्षमता पर भी नज़र रखनी होगी, जो ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volumes) और समग्र प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
