Reliance Power के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी की **₹2,032.81 करोड़** की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। यह मामला 2006-2008 के दौर की कथित FEMA नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 12 अक्टूबर, 2026 के एक आदेश के तहत Reliance Power की बड़ी संपत्ति को फ्रीज कर दिया है। इसमें कंपनी की सहायक इकाई Sasan Power Limited के शेयर शामिल हैं, जिनकी वैल्यू ₹2,026.65 करोड़ है। इसके अलावा कंपनी के ₹6.16 करोड़ के बैंक बैलेंस को भी सीज किया गया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 की धारा 37A के तहत की गई है।
निवेशकों के लिए चिंता की बात
इस कुर्की के बाद कंपनी इन संपत्तियों को न तो बेच सकती है और न ही कहीं गिरवी रख सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि Sasan Power Limited के जो शेयर जब्त किए गए हैं, वे पहले से ही Power Finance Corporation Limited के पास गिरवी हैं। सरकारी कर्जदाता के पास गिरवी रखी संपत्ति पर ED की इस कार्रवाई से कंपनी के फाइनेंशियल अरेंजमेंट्स और कानूनी दांव-पेंच उलझ गए हैं।
क्या है विवाद की जड़?
यह मामला करीब दो दशक पुराने इतिहास से जुड़ा है। ED का आरोप है कि 2006 में जारी किए गए फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs) और 2008 में सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी में किए गए निवेश में FEMA की धारा 4 का उल्लंघन हुआ है।
कंपनी का क्या कहना है?
Reliance Power ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मैनेजमेंट का कहना है कि 2008 में किए गए सभी विदेशी निवेश उस समय के जरूरी नियमों और अप्रूवल के साथ किए गए थे। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अभी तक कोई फाइनेंशियल जुर्माना नहीं लगाया गया है और वे शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
आगे क्या होगा?
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) इस आदेश पर क्या फैसला लेते हैं। यदि यह कुर्की बरकरार रहती है, तो कंपनी की वित्तीय स्थिरता पर दबाव बढ़ सकता है और स्टॉक में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
