Reliance Infrastructure (RInfra) को बड़ा झटका लगा है। इसकी सब्सिडियरी, HK Toll Road Private Limited, को NCLT मुंबई ने कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में स्वीकार कर लिया है। कंपनी पर **₹282.60 करोड़** का डिफॉल्ट था। अच्छी खबर यह है कि RInfra का इसमें **₹355 करोड़** का एक्सपोजर पहले से ही प्रोवाइडेड फॉर है।
RInfra की सब्सिडियरी HK Toll Road दिवालियापन की कगार पर!
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) मुंबई ने Reliance Infrastructure की सब्सिडियरी, HK Toll Road Private Limited को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में डाल दिया है। यह फैसला ₹282.60 करोड़ के डिफॉल्ट के चलते लिया गया है। वहीं, Reliance Infrastructure ने साफ कर दिया है कि इस सब्सिडियरी में उनका करीब ₹355 करोड़ का एक्सपोजर पहले से ही उनके खातों में प्रोवाइडेड फॉर (provided for) है।
क्या हुआ?
NCLT मुंबई ने 11 जून 2026 को HK Toll Road Private Limited को CIRP में स्वीकार किया। इस प्रक्रिया की शुरुआत कैनेरा बैंक (Canara Bank) ने की थी, जिसका आरोप है कि कंपनी ने 28 फरवरी 2025 तक ₹282.60 करोड़ का भुगतान नहीं किया। इस वजह से सब्सिडियरी के अकाउंट को 30 मार्च 2024 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था।
क्यों है यह अहम?
सब्सिडियरी का इंसॉल्वेंसी में जाना भविष्य की रिकवरी को लेकर अनिश्चितता पैदा करता है। Reliance Infrastructure के लिए, भले ही एक्सपोजर प्रोवाइडेड फॉर है, यह घटना ग्रुप की अन्य कंपनियों में वित्तीय दबाव को दिखाता है। इस पूरे मामले की जड़ नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा कंपनी के कंसेशन एग्रीमेंट को टर्मिनेट करना है।
जानिए पूरी कहानी
HK Toll Road Private Limited की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब NHAI ने 22 जनवरी 2024 को इसका कंसेशन एग्रीमेंट रद्द कर दिया। सब्सिडियरी कंपनी इस टर्मिनेशन को अवैध मानती है और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में अपील दायर कर चुकी है। कंपनी का मानना है कि NHAI के खिलाफ उसके बड़े दावे हैं, जो उसके कर्ज की देनदारियों को चुकाने के लिए काफी हो सकते हैं।
इस प्रोजेक्ट की अनुमानित इनिशियल लागत ₹925.44 करोड़ थी, जिसमें ₹555.26 करोड़ का टर्म लोन और ₹370.18 करोड़ का प्रमोटर कंट्रीब्यूशन शामिल था।
अब क्या होगा?
CIRP में प्रवेश के साथ, मिस्टर संजय कुमार मिश्रा को सब्सिडियरी के अफेयर्स को संभालने के लिए इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त किया गया है। अब इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया का लक्ष्य कंपनी के कर्ज का समाधान खोजना होगा। सब्सिडियरी का कहना है कि NHAI के खिलाफ चल रहे कानूनी मामले को देखते हुए CIRP जल्दबाजी में लिया गया फैसला है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह मामला सुलझने पर कंपनी की स्थिति फिर से ठीक हो सकती है।
जोखिम क्या हैं?
सबसे बड़ा जोखिम NHAI के साथ चल रहे कानूनी विवाद का नतीजा है। अथॉरिटी के खिलाफ सब्सिडियरी के संभावित दावे उसकी रिकवरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। सब्सिडियरी की सीमित संपत्ति, जिसमें मुख्य रूप से विवादित हाईवे कंसेशन शामिल है, भी एक बड़ी चिंता का विषय है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को CIRP की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट में सब्सिडियरी की कानूनी चुनौती की प्रगति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। किसी भी संभावित रेजोल्यूशन प्लान या रिकवरी की संभावनाओं पर नजर रखना इस एसेट के भविष्य के वैल्यूएशन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
