Canara Bank ने Reliance Telecom Limited और उसके पूर्व प्रमोटर को 'Wilful Defaulter' करार दिया है। बैंक ने फंड डायवर्जन के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि Reliance Communications का कहना है कि IBC के तहत उन्हें कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
क्या है पूरा मामला?
Canara Bank की रिव्यू कमेटी ने 31 अगस्त, 2026 को यह बड़ा फैसला सुनाया है। बैंक का आरोप है कि Reliance Telecom Limited (RTL) ने फंड का गलत इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ₹12,000 करोड़ से ज्यादा की राशि को रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन (Related-party transactions) में डायवर्ट किया गया। साथ ही, Netizen नाम की कंपनी को दिए गए ₹5,525 करोड़ के कैपिटल एडवांसेज पर भी बैंक ने सवाल उठाए हैं और इसे पारदर्शी नहीं माना है।
क्यों अहम है यह कदम?
'Wilful Defaulter' का टैग लगना कंपनी और प्रमोटर्स के लिए एक बड़ी गवर्नेंस समस्या है। इसका मतलब है कि अब इन्हें नए क्रेडिट या कैपिटल मार्केट तक पहुंच में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। यह घटना उन निवेशकों और क्रेडिटर्स के लिए चिंता का विषय है जो कंपनी की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में शामिल हैं।
कंपनी का बचाव और IBC का दांव
Reliance Communications ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) का हवाला दिया है। कंपनी के अनुसार:
- सेक्शन 14: इसके तहत मोरेटोरियम (Moratorium) लागू होता है, जो कानूनी कार्यवाही पर रोक लगाता है।
- सेक्शन 32A: कंपनी का कहना है कि इनसॉल्वेंसी शुरू होने से पहले की गई किसी भी गतिविधि के लिए उन्हें रिजॉल्यूशन प्लान के तहत इम्यूनिटी (Immunity) मिली हुई है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें NCLT की कार्यवाही पर टिकी हैं। भले ही कंपनी खुद को सुरक्षित मान रही हो, लेकिन अगर 'विलफुल' नेचर के डिफॉल्ट में क्रिमिनल एलिमेंट पाए जाते हैं, तो कानूनी पेंच फंस सकते हैं। यह पूरा मामला रिजॉल्यूशन की समय-सीमा को और अधिक लंबा खींच सकता है।
