PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने Reliance Communications की **₹581.65 करोड़** की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की (Attachment) को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने इसे रोकने के लिए दलीलें दी थीं, लेकिन अथॉरिटी ने उन्हें खारिज कर दिया है।
PMLA का कड़ा रुख
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने Reliance Communications की संपत्तियों को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। मार्च 2026 में जारी किए गए प्रोविजनल ऑर्डर को अब आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी गई है। यह कुर्की अगले 365 दिनों तक या स्पेशल कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।
क्यों अहम है यह फैसला?
इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि PMLA की कार्यवाही, कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) की सुरक्षा से ऊपर है। कंपनी ने तर्क दिया था कि ये संपत्तियां अपराध से नहीं जुड़ी हैं और IBC के तहत इन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन अथॉरिटी ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया है। यह कदम कंपनी के रेजोल्यूशन प्रोसेस और लिक्विडेशन वैल्यू के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
आगे क्या?
कंपनी के पास अब अपील करने का रास्ता खुला है। Reliance Communications के पास अपीलेट ट्रिब्यूनल में चुनौती देने के लिए 45 दिनों का समय है। निवेशकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या कंपनी कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाएगी और इससे रेजोल्यूशन की टाइमलाइन पर क्या असर पड़ेगा।
