Rekvina Laboratories अपने 26% शेयर ₹10 प्रति शेयर के भाव पर वापस खरीदेगी, जिसके लिए कुल ₹2.89 करोड़ का ओपन ऑफर लाया जाएगा। यह कदम Radiant Parenterals के अधिग्रहण के बाद उठाया जा रहा है, जो कंपनी के नियंत्रण को मजबूत करेगा। हालांकि, कंपनी बढ़ते घाटे और निगेटिव नेट वर्थ (Negative Net Worth) का सामना कर रही है।
Rekvina Laboratories का बड़ा कदम: ओपन ऑफर के साथ अधिग्रहण
Rekvina Laboratories ने 28,90,100 शेयरों का ओपन ऑफर लाया है, जो कंपनी की एक्सपैंडेड शेयर कैपिटल (Expanded Share Capital) का 26% है। इस ऑफर का प्राइस ₹10 प्रति शेयर रखा गया है, और इसके तहत कुल ₹2.89 करोड़ (₹289.01 लाख) का अधिकतम अमाउंट खर्च किया जाएगा। यह ऑफर 1 जुलाई 2026 से 14 जुलाई 2026 तक खुला रहेगा।
क्यों लाया जा रहा है ये ऑफर?
यह ओपन ऑफर Radiant Parenterals Limited के अधिग्रहण से जुड़ा है, जिसे एक सिक्योरिटीज एक्सचेंज एंड परचेज एग्रीमेंट (SEPA) के जरिए पूरा किया जाएगा। अधिग्रहण के बाद Radiant, Rekvina की पूरी तरह से सब्सिडियरी (Wholly-owned Subsidiary) बन जाएगी। इस डील के लिए Radiant के सेलर्स को Rekvina के शेयर प्रीफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के जरिए दिए जाएंगे। डील पूरी होने के बाद, ध्रुवलकुमार पटेल कंपनी के प्रमोटर (Promoter) बन जाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इस ओपन ऑफर के जरिए मौजूदा पब्लिक शेयरहोल्डर्स (Public Shareholders) को ₹10 प्रति शेयर के तय भाव पर कंपनी से बाहर निकलने (Exit) का मौका मिलेगा। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि कंपनी लगातार घाटे में चल रही है और इसका नेट वर्थ (Net Worth) भी कम हो रहा है। नए मैनेजमेंट के तहत कंपनी के टर्नअराउंड (Turnaround) की संभावनाओं का आंकलन करना महत्वपूर्ण होगा।
कंपनी की कमजोर फाइनेंशियल पोजीशन
Rekvina Laboratories ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹0.25 करोड़ (₹25.47 लाख) का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 के ₹0.14 करोड़ (₹13.71 लाख) के लॉस से ज्यादा है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का नेट वर्थ गिरकर (₹1.23 करोड़) (₹122.82 लाख) निगेटिव टेरिटरी में पहुंच गया है। ये आंकड़े कंपनी की लगातार कमजोर वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं।
आगे क्या होगा?
Radiant Parenterals के अधिग्रहण से कंपनी का कंट्रोल नए प्रमोटर्स के हाथ में आ जाएगा। इस ट्रांजेक्शन के बाद, पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25% से नीचे जा सकती है, जिसके लिए Rekvina को भविष्य में रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) के लिए कदम उठाने होंगे। ओपन ऑफर मौजूदा पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए एग्जिट का एक जरिया है।
किन रिस्क पर रखें नजर?
निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम कंपनी का लगातार घाटा और निगेटिव नेट वर्थ है, जो बैलेंस शीट की कमजोर सेहत का संकेत देता है। इसके अलावा, ट्रांजेक्शन के बाद मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स (Minimum Public Shareholding Norms) का पालन न करने की संभावना भी एक बड़ा जोखिम है, जिसके लिए कंपनी को आगे रेगुलेटरी एक्शन लेना पड़ सकता है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को ओपन ऑफर पर मिलने वाली प्रतिक्रिया और कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए मैनेजमेंट की योजनाओं पर करीब से नजर रखनी चाहिए। मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग रेगुलेशन का अनुपालन भी एक अहम बिंदु रहेगा जिस पर नजर बनाए रखनी होगी।
