Regency Fincorp ने अपनी उधारी की सीमा को **₹1,300 करोड़** तक बढ़ाने और मौजूदा कर्ज को इक्विटी में बदलने की बड़ी योजना बनाई है।
क्या है कंपनी की नई रणनीति?
कंपनी बोर्ड ने 2 सितंबर, 2026 को हुई मीटिंग में बड़ा बदलाव करते हुए उधारी की सीमा को बढ़ाकर ₹1,300 करोड़ करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने कर्ज को इक्विटी शेयरों में बदलने का रास्ता भी खोल दिया है। यह कदम कंपनी की फाइनेंशियल मजबूती के लिए उठाया गया है, लेकिन इसके लिए क्रेडिटर्स और आगामी AGM में शेयरधारकों की सहमति जरूरी होगी।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
डेट-टू-इक्विटी कन्वर्जन का सीधा मतलब है कि अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो कंपनी की इक्विटी में इजाफा होगा, जिससे मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में डाइल्यूशन (Dilution) का जोखिम पैदा हो सकता है। यह कदम कंपनी को अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने या पुराने कर्ज को रिफाइनेंस करने में मदद करेगा।
मैनेजमेंट में बड़े बदलाव
कंपनी ने गवर्नेंस लेवल पर भी फेरबदल किए हैं। विशाल राय सरीन अब होल-टाइम डायरेक्टर की जगह नॉन-एक्जीक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर होंगे। इसके अलावा, मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव कुमार, होल-टाइम डायरेक्टर सरफराज मल्लिक और COO नेहा अब्रोल के नए सैलरी पैकेज को मंजूरी दी गई है, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
आगे क्या देखें?
निवेशकों की नजरें अब 29 सितंबर, 2026 को होने वाली 33वीं AGM पर टिकी हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक में इन प्रस्तावों पर होने वाली वोटिंग ही कंपनी के भविष्य के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को तय करेगी।
