Rajeswari Infrastructure: Insolvency में फंसी कंपनी, ऑडिटर ने दी 'अस्वीकरण की राय'

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Rajeswari Infrastructure: Insolvency में फंसी कंपनी, ऑडिटर ने दी 'अस्वीकरण की राय'

Rajeswari Infrastructure Ltd की हालत इन दिनों पतली है, कंपनी कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। वहीं, ऑडिटर ने रिकॉर्ड की कमी के चलते 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) जारी कर दिया है। इससे शेयरहोल्डर्स के वोटिंग राइट्स पर भी रोक लगा दी गई है।

Rajeswari Infrastructure Ltd: दिवालिया प्रक्रिया के बीच ऑडिटर की चिंता

वित्तीय वर्ष 2024-25 में Rajeswari Infrastructure Ltd का ग्रॉस टर्नओवर शून्य रहा। कंपनी ने ₹0.09 करोड़ (यानी ₹9.11 लाख) का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹0.21 करोड़ के लॉस से कम है। इसी तरह, कंपनी की अन्य इनकम भी घटकर ₹0.05 करोड़ रह गई, जो पिछले साल ₹0.06 करोड़ थी।

क्या हुआ?

Rajeswari Infrastructure Ltd फिलहाल कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दायरे में है। कंपनी के स्टेटुटरी ऑडिटर, M/s KMKU & Associates, ने 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है। इसका मतलब है कि रिकॉर्ड्स तक सीमित पहुंच के कारण ऑडिटर कंपनी के वित्तीय बयानों पर कोई राय नहीं दे पाए हैं।

यह क्यों मायने रखता है?

'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' निवेशकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यह दर्शाता है कि ऑडिटर के पास कंपनी की वित्तीय स्थिति पर राय बनाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। रिकॉर्ड्स तक पहुंचने, संपत्तियों और देनदारियों को सत्यापित करने, और कुछ संपत्तियों की वसूली का आकलन करने में आई दिक्कतों के चलते ऐसा हुआ है। कंपनी की वर्तमान परिचालन स्थिति भी दिवालिया कार्यवाही से बुरी तरह प्रभावित है।

जानिए पूरी कहानी

यह CIRP, Intec Capital Limited द्वारा शुरू की गई थी। 13 जनवरी 2026 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा श्री गुरुस्वामी राममूर्ति द्वारा प्रस्तुत एक रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी गई थी। CIRP के दौरान, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अधिकार निलंबित रहते हैं और एक मॉनिटरिंग कमेटी कंपनी के कामकाज का प्रबंधन करती है। स्वीकृत योजना के अनुसार, मौजूदा शेयरधारकों के वोटिंग राइट्स भी निलंबित कर दिए गए हैं।

अब क्या बदलेगा?

दिवालियापन के कारण कंपनी के संचालन सीमित हैं। देरी से फाइलिंग सहित कई रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंसेज की सूचना मिली है, जिसे दिवालिया प्रक्रिया से उत्पन्न परिचालन बाधाओं का परिणाम बताया गया है। शेयरधारकों के अधिकारों, जिसमें वोटिंग राइट्स भी शामिल हैं, पर रोक जारी है। अब सारा ध्यान स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान को लागू करने और प्रबंधन के हस्तांतरण पर है।

निवेशकों के लिए जोखिम

निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम ऑडिटर के 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' से उत्पन्न पारदर्शिता की कमी और शेयरधारकों के अधिकारों का निलंबन है। संपत्तियों की वसूली और देनदारियों के सटीक मूल्यांकन के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है। कंपनी ₹11 करोड़ से अधिक के बड़े ऋण डिफॉल्ट का भी सामना कर रही है।

ऑडिटर की राय का मतलब

'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' ऑडिटर की कुछ इन्वेंट्री, फिक्स्ड एसेट्स और टैक्स बैलेंसेस के अस्तित्व या मूल्यांकन को सत्यापित करने में असमर्थता से उपजा है। कुछ संपत्तियों की वसूली से जुड़ी अनिश्चितताओं ने इस स्थिति को और बढ़ाया है। ऐसे में कंपनी की असल वित्तीय सेहत का पता लगाना मुश्किल हो गया है।

अहम आंकड़े:

  • स्थिति: कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत।
  • राजस्व (FY25): शून्य।
  • नेट प्रॉफिट/(लॉस) (FY25): ₹(0.09) करोड़
  • ऑडिटर की राय: डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन।
  • रेजोल्यूशन प्लान की मंजूरी: 13 जनवरी 2026
  • कुल डिफॉल्ट: ₹11 करोड़ से अधिक।

आगे क्या देखें

निवेशकों को कंपनी और एक्सचेंज से रेजोल्यूशन प्लान के कार्यान्वयन की प्रगति और प्रबंधन के अंतिम हस्तांतरण के संबंध में आने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। अनुपालन मुद्दों पर किसी भी अपडेट और समाधान के बाद वित्तीय विवरणों पर स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी।

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