RBL Bank ने भाविन लखपतवाला को नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और की मैनेजेरियल पर्सनेल (KMP) नियुक्त किया है। उनके पास 25 साल से ज़्यादा का अनुभव है, जिसमें HDFC बैंक-HDFC लिमिटेड के मर्जर में अहम भूमिका निभा चुके हैं। दीपक रुईया अंतरिम CFO से डेप्युटी CFO बनेंगे, जिससे कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी।
RBL Bank में नए फाइनेंस हेड की हुई नियुक्ति
RBL Bank के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने भाविन लखपतवाला के नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और की मैनेजेरियल पर्सनेल (KMP) के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति 12 जून, 2026 से प्रभावी होगी।
क्यों अहम है ये बदलाव?
फाइनेंस डिपार्टमेंट में यह लीडरशिप बदलाव निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए बेहद ज़रूरी है। लखपतवाला का अनुभव, खासकर मर्जर और स्ट्रेटेजिक फाइनेंस में, RBL Bank के फाइनेंशियल मैनेजमेंट और गवर्नेंस को मज़बूत करने पर ज़ोर देता है। दीपक रुईया के डेप्युटी CFO बने रहने से यह सुनिश्चित होगा कि कामकाज में कोई रुकावट न आए और एक स्थिर ट्रांज़िशन हो सके।
भाविन लखपतवाला का बैकग्राउंड
भाविन लखपतवाला के पास फाइनेंशियल कंट्रोल, बिज़नेस फाइनेंस, इन्वेस्टर रिलेशन्स और स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव्स में 25 साल से ज़्यादा का अनुभव है। वे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। RBL Bank से जुड़ने से पहले, उन्होंने HDFC के साथ दो दशक से ज़्यादा समय बिताया है। वहां वे HDFC बैंक के CFO लीडरशिप टीम का हिस्सा थे और HDFC बैंक-HDFC लिमिटेड के मर्जर में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अब क्या बदलेगा?
फाइनेंस की कमान संभालने के साथ, RBL Bank लखपतवाला की विशेषज्ञता का इस्तेमाल स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल प्लानिंग और एग्जीक्यूशन के लिए करेगा। रुईया का डेप्युटी CFO बनना यह पक्का करेगा कि उनके अंतरिम CFO के अनुभव का लाभ बैंक के फाइनेंस फंक्शन को मिलता रहे, जिससे निरंतरता बनी रहेगी।
आगे क्या देखना होगा?
इस नियुक्ति को सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि लखपतवाला अपनी रणनीतियों को कैसे लागू करते हैं और RBL Bank के ऑपरेशनल फ्रेमवर्क में कैसे फिट होते हैं। फाइनेंशियल स्ट्रेटेजी या परफॉरमेंस में कोई भी बड़ा बदलाव अहम संकेत देगा।
ज़रूरी तारीखें
यह नियुक्ति 12 जून, 2026 से लागू होगी। जिस बोर्ड मीटिंग में इस पर मुहर लगी, वह भी 12 जून, 2026 को शाम 6:07 बजे शुरू होकर 7:26 बजे ख़त्म हुई थी।
