RBI FCNR(B) Swap Facility: खत्म हुआ बड़ा विदेशी फंड का दौर, बैंकों के सामने अब यह है नई चुनौती

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI FCNR(B) Swap Facility: खत्म हुआ बड़ा विदेशी फंड का दौर, बैंकों के सामने अब यह है नई चुनौती

RBI ने अपनी स्पेशल FCNR(B) स्वैप सुविधा को सफलतापूर्वक बंद कर दिया है, जिसके जरिए कुल **$136.4 बिलियन** का विदेशी फंड जुटाया गया है। इस लिक्विडिटी के कारण बैंकों में डिपॉजिट तो बढ़ा है, लेकिन अब नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

भारी लिक्विडिटी और क्रेडिट ग्रोथ

31 अगस्त, 2026 तक कुल विदेशी फंड जुटाने का आंकड़ा $136.4 बिलियन तक पहुंच गया है, जिसमें अकेले $127.2 बिलियन FCNR(B) डिपॉजिट्स शामिल हैं। इस भारी फंड के चलते सिस्टम की लिक्विडिटी ₹7.8 लाख करोड़ तक पहुंच गई है, जिससे फाइनेंशियल ईयर FY27 में 15-16% की क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

बैंकों के लिए 'दोधारी तलवार'

यह लिक्विडिटी बैंकों के लिए राहत की बात तो है, लेकिन मैनेजमेंट के सामने अब फंड को सही जगह निवेश करने की चुनौती है। चूंकि इन विदेशी फंड्स पर स्प्रेड कम होता है, इसलिए जब तक बैंक इस पैसे को घरेलू लोन मार्केट में बेहतर रिटर्न देने वाली स्कीम्स में नहीं लगा देते, तब तक मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।

प्रमुख खिलाड़ियों का प्रदर्शन

  • ICICI Bank: बैंक ने $17.88 बिलियन जुटाए, जो कुल इनफ्लो का 14.1% हिस्सा है। साथ ही बैंक ने अपनी इंटरनेशनल शाखाओं के माध्यम से $9 बिलियन की तैनाती भी की है।
  • RBL Bank: बैंक ने $3.4 बिलियन जुटाए हैं, जो इसके Q1 डिपॉजिट बेस का लगभग 26% है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि बैंक कितनी तेजी से इन फंड्स को रिटेल और कॉर्पोरेट लोन में बदल पाते हैं। अगर फंड का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, तो आने वाली तिमाहियों में बैंकों के मुनाफे और मार्जिन पर इसका असर दिख सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.