Prime Securities का FY26 का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कंपनी का रेवेन्यू **54.3%** बढ़कर **₹127.68 करोड़** पर पहुंच गया है, लेकिन नए वर्टिकल्स में भारी निवेश के चलते नेट प्रॉफिट घटकर **₹14.33 करोड़** रह गया है। कैश बचाने के लिए बोर्ड ने इस बार डिविडेंड न देने का फैसला लिया है।
मुनाफे में सुस्ती क्यों?
कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदल रही है। साल दर साल की तुलना करें तो रेवेन्यू ₹79.80 करोड़ से बढ़कर ₹127.68 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल मुनाफा ₹38.48 करोड़ था जो अब ₹14.33 करोड़ रह गया है। कंपनी ने अपनी सारी ताकत नए बिजनेस वर्टिकल्स जैसे वेल्थ मैनेजमेंट और एसेट मैनेजमेंट को खड़ा करने में लगा दी है।
बड़े बदलाव और ग्रोथ प्लान
कंपनी की वेल्थ मैनेजमेंट इकाई, Prime Trigen Wealth, ने अब तक 850 क्लाइंट्स जोड़े हैं और ₹3,500 करोड़ के एसेट्स अंडर एडवाइस (AUA) को मैनेज कर रही है। इसके अलावा, कंपनी Prime Litmus Investment Management Ltd के जरिए एसेट मैनेजमेंट स्पेस में कदम रख चुकी है। साथ ही, कंपनी ने यूके में Prime Advisory Partners में हिस्सेदारी ली है और दुबई में भी अपना विस्तार किया है।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
अभी कंपनी का पूरा ध्यान सेटअप और इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जिससे मार्जिन पर दबाव दिख रहा है। आने वाले समय में Prime Litmus Real Estate Opportunities Fund के लॉन्च और नए निवेशों से होने वाली कमाई पर निवेशकों की नजर टिकी रहेगी। मैनेजमेंट का साफ कहना है कि फिलहाल कैश को बिजनेस के विस्तार के लिए सुरक्षित रखना प्राथमिकता है, इसलिए इस साल निवेशकों को डिविडेंड नहीं मिलेगा।
