NBFC सेक्टर की दिग्गज कंपनी Poonawalla Fincorp ने अपने कामकाज को और रफ्तार देने के लिए बड़ी योजना बनाई है। कंपनी ने **₹2,000 करोड़** तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने को मंजूरी दे दी है।
फंड जुटाने की पूरी डिटेल
कंपनी की फाइनेंस कमेटी ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए फंड जुटाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इस इश्यू का बेस साइज ₹1,000 करोड़ रखा गया है, जिसमें ₹1,000 करोड़ का ग्रीन शू ऑप्शन भी शामिल है। ये सिक्योरिटीज BSE पर लिस्ट की जाएंगी और इनका फेस वैल्यू ₹1,00,000 प्रति डिबेंचर तय किया गया है। ये डिबेंचर्स FY 2026-27 में मैच्योर होंगे।
क्यों है ये अहम?
किसी भी NBFC के लिए अपनी लिक्विडिटी को मजबूत रखना बेहद जरूरी है ताकि लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाया जा सके। इस फंड से कंपनी अपने बोर्रोइंग प्रोफाइल को बेहतर करेगी। ग्रीन शू ऑप्शन का फायदा यह होगा कि अगर संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) से अच्छी मांग आती है, तो कंपनी आसानी से अतिरिक्त पैसा जुटा सकेगी।
सुरक्षा और नियम
ये NCDs कंपनी की एसेट्स पर 'फर्स्ट-रैंकिंग परी पासु चार्ज' (first-ranking pari passu charge) द्वारा सुरक्षित हैं। कंपनी ने इसमें एक सख्त नियम भी रखा है—यदि ब्याज या मूलधन के भुगतान में 3 महीने से ज्यादा की देरी होती है, तो कंपनी को बेस कूपन रेट पर अतिरिक्त 2% का जुर्माना (Penalty) देना होगा।
अब निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले समय में कंपनी की क्वार्टरली फाइलिंग पर नजर रखना जरूरी है। इससे यह पता चलेगा कि इस फंड का इस्तेमाल कंपनी किस तरह कर रही है और इसका असर कंपनी के इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (Interest Coverage Ratio) पर क्या पड़ता है। साथ ही, यह इश्यू कंपनी की साख (Credit Standing) को मापने का भी एक जरिया बनेगा।
