Paragon Finance के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 की शुरुआत मुश्किलों भरी रही है। कंपनी को **₹1.11 करोड़** का नेट लॉस हुआ है और मैनेजमेंट ने खर्चों पर लगाम लगाने के लिए सैलरी में भारी कटौती की घोषणा की है।
मुनाफे से नुकसान की ओर सफर
वित्तीय मोर्चे पर Paragon Finance के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹0.31 करोड़ का मुनाफा कमाने वाली यह कंपनी इस बार ₹1.11 करोड़ के नेट लॉस में आ गई है। कंपनी की कुल इनकम में भी बड़ी गिरावट देखी गई है, जो पिछले साल के ₹2.80 करोड़ से घटकर इस साल सिर्फ ₹1.29 करोड़ रह गई है। नतीजों की कमजोरी को देखते हुए बोर्ड ने इस बार कोई डिविडेंड (Dividend) न देने का फैसला किया है।
मैनेजमेंट का बड़ा कदम: सैलरी में कटौती
कंपनी के बिगड़ते फाइनेंशियल हालातों के बीच मैनेजमेंट ने 'कॉस्ट कटिंग' का सख्त रास्ता चुना है। 1 मई 2026 से प्रभावी इन बदलावों के तहत, संजय कुमार गुप्ता की मंथली सैलरी ₹3 लाख से घटाकर ₹1 लाख कर दी गई है। वहीं, आलोक कुमार गुप्ता की सैलरी ₹5 लाख से घटकर अब ₹50,000 कर दी गई है।
बोर्ड में बदलाव और कानूनी विवाद
कंपनी के गवर्नेंस में भी फेरबदल हुए हैं। रबीना अग्रवाल को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है, जबकि अंशुल गोयनका ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये दोनों बदलाव 31 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगे।
निवेशकों के लिए एक और चिंता का विषय कंपनी से जुड़ा कानूनी मामला है। Paragon Finance फिलहाल 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881' के तहत एक कानूनी विवाद का सामना कर रही है, जिसकी 'क्वैशिंग पिटीशन' (Quashing Petition) कर्नाटक हाई कोर्ट में पेंडिंग है। कंपनी अपनी 40वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 26 सितंबर 2026 को आयोजित करने वाली है, जहां इन फैसलों पर आगे की चर्चा होगी।
