Panafic Industrials Share: कंपनी को हुआ ₹2.37 करोड़ का नुकसान, नाम बदलने की तैयारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Panafic Industrials Share: कंपनी को हुआ ₹2.37 करोड़ का नुकसान, नाम बदलने की तैयारी

Panafic Industrials Ltd ने 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर में **₹2.37 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुनाफे से बिल्कुल उलट है। कंपनी अब अपना नाम बदलकर Panafic Investment and Finance Limited करने की योजना बना रही है।

Panafic Industrials के नतीजे:

Panafic Industrials Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को ₹2.37 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹2.84 लाख का मामूली मुनाफा हुआ था।

रेवेन्यू में बढ़त के बावजूद घाटा:

खास बात यह है कि कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 15.74% की बढ़त हुई है और यह ₹0.76 करोड़ तक पहुँच गया है। इसके बावजूद, कंपनी घाटे में रही। इसी घाटे के चलते, कंपनी ने कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देने का फैसला किया है।

नाम बदलने की योजना:

कंपनी अब अपना नाम बदलकर "Panafic Investment and Finance Limited" करने का प्रस्ताव रख रही है। यह बदलाव जरूरी अप्रूवल मिलने के बाद होगा और कंपनी की बिजनेस एक्टिविटीज से मेल खाएगा।

कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड:

पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, Panafic Industrials Ltd ने ₹0.03 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। कंपनी ने कैपिटल जुटाने के लिए राइट्स इश्यू (Rights Issue) भी किया था, जिसका अलॉटमेंट 26 मई, 2026 को पूरा हो गया था।

आगामी AGM और ऑडिटर:

कंपनी की 41वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 11 सितंबर, 2026 को निर्धारित है। इस मीटिंग में नाम बदलने और ऑडिटर की नियुक्ति जैसे अहम फैसले लिए जाएंगे। M/s. J Sharma & V Sharma Associates LLP को अगले पांच साल के लिए नया सेक्रेटेरियल ऑडिटर (Secretarial Auditor) बनाने का प्रस्ताव है।

कंप्लायंस के मुद्दे:

सेक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट में कई कंप्लायंस (Compliance) से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। इनमें शेयरहोल्डिंग पैटर्न सबमिशन में देरी और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Independent Director) के रजिस्ट्रेशन की एक्सपायरी शामिल है। शेयरहोल्डिंग पैटर्न की देरी के लिए कंपनी पर ₹1.20 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। ऑडिटर ने कंपनी की शेयर अधिग्रहण गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं। ये मुद्दे भविष्य में रेगुलेटरी जांच का कारण बन सकते हैं।

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