PNB Housing Finance: शानदार नतीजे! FY26 में मुनाफा 18% बढ़ा, एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
PNB Housing Finance: शानदार नतीजे! FY26 में मुनाफा 18% बढ़ा, एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार

PNB Housing Finance ने FY26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) 18% बढ़कर ₹2,291 करोड़ हो गया है। वहीं, कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है, ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) पहली बार 1% से नीचे आकर 0.93% पर आ गया है।

Detailed Coverage

PNB Housing Finance ने FY26 में दर्ज की दमदार ग्रोथ: 18% बढ़ा मुनाफा

PNB Housing Finance ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY26) के लिए अपने नतीजों की घोषणा कर दी है। कंपनी ने इस अवधि में ₹2,291.24 करोड़ का नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Net Profit After Tax) दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 18.3% ज्यादा है। वहीं, नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) में भी 13.1% की बढ़त देखी गई और यह ₹3,109.77 करोड़ पर पहुंच गई।

एसेट क्वालिटी में ऐतिहासिक सुधार

कंपनी के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) के मोर्चे पर आई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) 15 bps घटकर 0.93% पर आ गए हैं, जो कि एक बड़ा माइलस्टोन है क्योंकि यह पहली बार 1% के नीचे दर्ज हुए हैं। इसी के साथ, नेट एनपीए (Net NPAs) भी 12 bps सुधरकर 0.57% पर आ गए हैं।

AUM और रिटेल लोन बुक में बढ़ोतरी

कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 13% बढ़कर ₹90,921 करोड़ हो गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से रिटेल लोन बुक में 16% की बढ़ोतरी के चलते हुई, जो अब ₹86,946 करोड़ पर पहुंच गई है। वहीं, डिस्बर्समेंट्स (Disbursements) में 21% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ ₹26,548 करोड़ दर्ज किए गए।

आगे क्या?

कंपनी के क्रेडिट रेटिंग्स में हुए सुधार (CARE और India Ratings द्वारा AAA 'Stable') से भविष्य में कंपनी की उधारी लागत कम होने और कैपिटल तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। मैनेजमेंट का लक्ष्य FY27 तक अफोर्डेबल हाउसिंग और इमर्जिंग मार्केट्स से कुल रिटेल बुक का 45% हिस्सा हासिल करना है। साथ ही, FY27 तक पूरी तरह से पेपरलेस लोन प्रक्रिया लागू करने पर भी कंपनी का फोकस है।

ध्यान रखने योग्य जोखिम

कंपनी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों को एक संभावित जोखिम बताया है, जिसका असर महंगाई, ब्याज दरों और कंपनी के खर्चों पर पड़ सकता है। इन मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स पर पैनी नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.