पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) ने REC लिमिटेड को PFC में मिलाने की मंजूरी दे दी है। शेयरधारकों को हर 100 REC शेयर के बदले 88 PFC शेयर मिलेंगे। इस मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी का लोन पोर्टफोलियो **₹11 लाख करोड़** से अधिक का होगा।
PFC और REC का होगा ऐतिहासिक विलय!
पावर सेक्टर की दो बड़ी सरकारी कंपनियां, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और REC लिमिटेड, अब एक होने जा रही हैं। PFC के बोर्ड ने REC लिमिटेड को PFC में पूरी तरह से मिलाने (Merger by Absorption) को मंजूरी दे दी है। इस डील के तहत, REC, PFC का हिस्सा बन जाएगी।
क्या है शेयर एक्सचेंज रेशियो?
इस मर्जर के लिए जो शेयर एक्सचेंज रेशियो तय किया गया है, उसके मुताबिक REC के हर 100 इक्विटी शेयर के बदले शेयरधारकों को PFC के 88 इक्विटी शेयर मिलेंगे। इस सौदे में किसी भी तरह का कैश पेमेंट नहीं किया जाएगा।
क्यों हो रहा है यह मर्जर?
इस विलय का मुख्य मकसद पावर सेक्टर में सरकारी सुधारों (Government Reforms) और एनर्जी ट्रांज़िशन (Energy Transition) के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है। इस मर्जर के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी का लोन पोर्टफोलियो ₹11 लाख करोड़ से भी ऊपर पहुंच जाएगा। इससे कंपनी की फाइनेंसिंग क्षमता बढ़ेगी, ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) सुधरेगी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नई ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के मौके भी बढ़ेंगे।
आगे क्या होगा?
REC लिमिटेड का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और यह PFC में समाहित हो जाएगी। हालांकि, इस मर्जर को अभी नियामकीय मंजूरी (Regulatory Approvals), शेयरधारकों और लेनदारों (Creditors) की सहमति मिलनी बाकी है। दोनों कंपनियां जल्द ही शेयर एक्सचेंज के लिए रिकॉर्ड डेट (Record Date) का ऐलान करेंगी। यह पूरी प्रक्रिया कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230 से 232 के तहत पूरी की जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस मर्जर के बाद बनने वाली बड़ी इकाई पावर सेक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े पैमाने पर फंडिग करने में सक्षम होगी। निवेशकों को आने वाले समय में रिकॉर्ड डेट और मर्जर पूरा होने की टाइमलाइन पर नजर रखनी होगी।
