PFC ने FY26 में दर्ज किया दमदार मुनाफा, REC के साथ विलय की तारीख तय
PFC ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए अपने वित्तीय नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी ने ₹33,625 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) हासिल किया है और ₹11.64 लाख करोड़ का लोन बुक बनाए रखा है।
FY26 में दमदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) ने निवेशकों की बैठक के दौरान FY26 के नतीजों की जानकारी दी। कंसोलिडेटेड PAT ₹33,625 करोड़ रहा, जबकि कंसोलिडेटेड लोन बुक ₹11.64 लाख करोड़ पर स्थिर रही। नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) 0.13% पर काफी कम रहे। वहीं, स्टैंडअलोन बेस पर PFC ने अब तक का सबसे ज्यादा नेट प्रॉफिट ₹20,051 करोड़ दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 16% ज्यादा है। कंपनी की नेट वर्थ ₹1 लाख करोड़ के पार निकल गई है।
REC के साथ रणनीतिक विलय की योजना
अपने मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के साथ, PFC ने REC के साथ प्रस्तावित विलय पर भी अपडेट दिया। इस कंसॉलिडेशन को 1 अप्रैल, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस विलय का उद्देश्य एक बड़ी और अधिक कुशल फाइनेंशियल संस्था का निर्माण करना है, जो भारत के बढ़ते पावर सेक्टर को बेहतर समर्थन दे सके। संयुक्त इकाई का लक्ष्य FY27 में लगभग 10% लोन ग्रोथ हासिल करना है।
PFC की बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदलाव
भारत के पावर प्रोजेक्ट्स के प्रमुख फाइनेंसर, PFC, संसाधनों को मजबूत करने और ऑपरेशनल तालमेल बढ़ाने के लिए REC के साथ विलय कर रही है। कंपनी की लोन बुक में काफी बढ़ोतरी हुई है, और इसका रणनीतिक फोकस अब नॉन-फॉसिल फ्यूल (गैर-जीवाश्म ईंधन) और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर की ओर बढ़ रहा है। इस विलय से कैपिटल एफिशिएंसी (पूंजी दक्षता) में सुधार और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की उम्मीद है, जिससे संयुक्त इकाई की फाइनेंसिंग क्षमताएं बढ़ेंगी।
ग्रीन एनर्जी और डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस
मैनेजमेंट ने कहा है कि अब पारंपरिक पावर जनरेशन से हटकर नॉन-फॉसिल फ्यूल प्रोजेक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर को प्राथमिकता दी जाएगी। लक्ष्य यह है कि नई एनर्जी/डिस्ट्रीब्यूशन और पारंपरिक जनरेशन के बीच 70-30 का लेंडिंग मिक्स (उधार अनुपात) हासिल किया जाए।
संभावित जोखिम और रेगुलेटरी बाधाएं
PFC को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि ब्याज दरों में गिरावट के माहौल में प्रीपेमेंट का दबाव और कमर्शियल बैंकों से प्रतिस्पर्धा, जो लोन ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। हालांकि PFC अपनी फॉरेन करेंसी (विदेशी मुद्रा) की अधिकांश एक्सपोजर को हेज करती है, फिर भी फॉरेक्स की अस्थिरता फंडिंग लागत को प्रभावित कर सकती है। इस विलय के लिए कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs - MCA), RBI, SEBI और संभवतः कैबिनेट और राष्ट्रपति की मंजूरी सहित कई रेगुलेटरी अप्रूवल की आवश्यकता होगी।
आगे का रास्ता और निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशक PFC-REC विलय के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल की प्रगति पर बारीकी से नजर रखेंगे। 1 अप्रैल, 2027 की लक्ष्य तिथि नजदीक आने पर इंटीग्रेशन (एकीकरण) प्रक्रिया पर अपडेट महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, प्रतिस्पर्धा के बीच लोन ग्रोथ बनाए रखने और फॉरेक्स की अस्थिरता को प्रबंधित करने की PFC की क्षमता प्रमुख कारक होंगे जिन पर निगरानी रखनी होगी।
