One MobiKwik Systems को RBI से NBFC के तौर पर काम करने की मंजूरी मिल गई है। कंपनी अपनी सब्सिडियरी MFSPL के जरिए अगले 3 से 6 महीनों में को-लेंडिंग मॉडल शुरू करने की योजना बना रही है।
RBI की हरी झंडी और नया सफर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने One MobiKwik Systems Limited को बड़ी राहत देते हुए उसे नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में काम करने का सर्टिफिकेट दे दिया है। यह मंजूरी कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, MobiKwik Financial Services Private Limited (MFSPL) को मिली है। अच्छी बात यह है कि यह लाइसेंस 'परपेचुअल' है, यानी इसकी कोई एक्सपायरी डेट नहीं है।
क्यों खास है यह कदम?
इस लाइसेंस के बाद MobiKwik केवल एक डिजिटल पेमेंट कंपनी नहीं रहेगी, बल्कि वह सीधे तौर पर लेंडिंग इकोसिस्टम (Lending Ecosystem) का हिस्सा बन जाएगी। कंपनी अब 'एसेट-लाइट को-लेंडिंग मॉडल' अपनाएगी, जिससे उसे बिना बड़ी बैलेंस-शीट रिस्क के बैंकों के साथ मिलकर कर्ज बांटने की ताकत मिलेगी।
अगले 3-6 महीने अहम
मैनेजमेंट ने संकेत दिए हैं कि अगले 3 से 6 महीनों में इस मॉडल को पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। इस बदलाव से कंपनी का मुख्य मकसद लेंडिंग मार्जिन को बेहतर करना और बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना है।
निवेशकों के लिए रडार पर क्या है?
आने वाले दो क्वार्टर्स में निवेशकों को इन चीजों पर नजर रखनी चाहिए:
- को-लेंडिंग पार्टनरशिप: बैंक और अन्य NBFCs के साथ कंपनी किस तरह के करार करती है।
- क्रेडिट वॉल्यूम: नए मॉडल के जरिए कितना कर्ज बांटा गया है।
- एसेट क्वालिटी: कंपनी के लेंडिंग पोर्टफोलियो की सेहत कैसी रहती है।
