NCLT से मिली रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी
31 जुलाई 2025 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Omkar Speciality Chemicals के रेजोल्यूशन प्लान को हरी झंडी दे दी है। इस प्लान के तहत कुल ₹26.65 करोड़ का समाधान राशि तय की गई है। दिसंबर 2025 तक कंपनी में ₹15.08 करोड़ का निवेश किया जा चुका है, जिससे कंपनी अब 'गोइंग कंसर्न' यानी चलती रहने वाली इकाई के तौर पर काम कर रही है।
यह क्यों अहम है?
NCLT की मंजूरी कंपनी के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फंड के निवेश का मकसद कंपनी के ऑपरेशन्स को स्थिर करना है। हालांकि, यह ध्यान रखना अहम है कि जून, सितंबर और दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाहियों में कंपनी ने शून्य रेवेन्यू और लगातार नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है।
जानिए पूरी कहानी
Omkar Speciality Chemicals कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजरी है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, रेजोल्यूशन प्लान से पहले कंपनी पर काफी घाटा था, जिसके कारण उसका नेट वर्थ (Net Worth) नेगेटिव हो गया था। CIRP प्रक्रिया के चलते फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के तुलनात्मक वित्तीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
अब क्या बदलेगा?
NCLT की मंजूरी के बाद मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है। श्री दीपक कुमार शॉ (Mr. Dipak Kumar Shaw) को नया CEO नियुक्त किया गया है, वहीं श्री रुहिणी कुमार चक्रवर्ती (Mr. Ruhini Kumar Chakraborty) को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Independent Director) बनाया गया है। ऑडिट कमेटी (Audit Committee) और स्टेकहोल्डर रिलेशनशिप कमेटी (Stakeholder's Relationship Committee) का भी पुनर्गठन किया गया है। साथ ही, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए M/s. R.R. Tibrewala & Co. और M/s. Aabid & Co. को क्रमशः नए स्टैट्यूटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) और सीक्रेटेरियल ऑडिटर (Secretarial Auditor) के रूप में नियुक्त किया गया है।
किन जोखिमों पर रखें नज़र?
कंपनी के लिए सबसे बड़े जोखिमों में लगातार रेवेन्यू का न होना और जारी घाटा शामिल है। ऑडिटर की रिपोर्ट में भी 'गोइंग कंसर्न' की धारणा को लेकर मटेरियल अनिश्चितता (Material Uncertainty) का उल्लेख किया गया है, भले ही रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी मिल गई हो।
सहकर्मी कंपनियों से तुलना
CIRP प्रक्रिया और हालिया ऑपरेशनल डेटा की कमी के कारण, वर्तमान वित्तीय प्रदर्शन की सीधे तौर पर सहकर्मी कंपनियों से तुलना करना संभव नहीं है। कंपनी का मुख्य ध्यान अब रेजोल्यूशन के बाद ऑपरेशन्स को फिर से पटरी पर लाने पर है।
अहम आंकड़े (समय-सीमा के अनुसार)
- नेट लॉस Q1 2025-26: ₹0.41 करोड़
- नेट लॉस Q2 2025-26: ₹0.52 करोड़
- नेट लॉस Q3 2025-26: ₹0.33 करोड़
- कुल संपत्ति (30 सितंबर 2025 तक): ₹46.23 करोड़
आगे क्या देखें?
निवेशकों को कंपनी द्वारा रेवेन्यू उत्पन्न करने, अपनी वित्तीय सेहत सुधारने और नए मैनेजमेंट और रेजोल्यूशन प्लान के तहत ऑपरेशन्स को स्थिर करने की दिशा में प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
