Olympic Management AGM: घाटा घटकर **₹14.44 लाख** हुआ, पर मैनेजमेंट की मुश्किलें बरकरार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Olympic Management AGM: घाटा घटकर **₹14.44 लाख** हुआ, पर मैनेजमेंट की मुश्किलें बरकरार

Olympic Management & Financial Services ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने नेट लॉस में कमी दर्ज की है। हालांकि, AGM के दौरान कंपनी की गवर्नेंस, रेगुलेटरी नॉन-कम्प्लायंस और खाली पदों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल

कंपनी ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजों में सुधार दिखाया है। पिछले साल का ₹45.40 लाख का नेट लॉस कम होकर अब ₹14.44 लाख पर आ गया है। साथ ही, रेवेन्यू में भी उछाल देखने को मिला है, जो पिछले साल के ₹5.14 लाख से बढ़कर ₹12.85 लाख तक पहुंच गया है।

गवर्नेंस और कंप्लायंस पर सवाल

42वीं AGM में कंपनी के कामकाज को लेकर चिंताजनक खुलासे हुए हैं। कंपनी वर्तमान में BSE के रिकॉर्ड्स में 'SDD Non-Compliant' के रूप में फ्लैग की गई है। इसके अलावा, बोर्ड ने पवन कुमार अग्रवाल को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर गलत तरीके से वर्गीकृत करने की भूल मानी है, जिसे अब सुधारा जा रहा है। साथ ही, कंपनी सेक्रेटरी का पद खाली होने के कारण फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर साइन करने में भी दिक्कतें आई हैं।

अब आगे क्या?

मैनेजमेंट ने पवन कुमार अग्रवाल को अब 'Executive Director' के तौर पर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, प्रमोटर शेयरहोल्डिंग को फिजिकल या एस्क्रो फॉर्मेट से रीक्लासिफाई करने की कोशिश हो रही है। कंपनी का दावा है कि SDD से जुड़ी खामियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

निवेशकों के लिए चेतावनी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को कंपनी सेक्रेटरी की नई नियुक्ति और SDD कंप्लायंस स्टेटस पर पैनी नजर रखनी चाहिए। एडमिनिस्ट्रेटिव गलतियों का बार-बार होना कंपनी के इंटरनल गवर्नेंस पर सवाल उठाता है, जो शेयर की स्टेबिलिटी के लिए सबसे बड़ा रिस्क बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.