NIIT Ltd: सब्सिडियरी मर्जर को NCLT की मंजूरी, कंपनी संरचना में बड़ा बदलाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
NIIT Ltd: सब्सिडियरी मर्जर को NCLT की मंजूरी, कंपनी संरचना में बड़ा बदलाव

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NIIT लिमिटेड को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से अपनी सब्सिडियरी कंपनियों के मर्जर को मंजूरी मिल गई है। यह कॉर्पोरेट कंसॉलिडेशन की दिशा में एक अहम कदम है। कंपनी अब पेंडिंग टैक्स डिस्प्यूट्स को भी निपटाएगी।

NIIT Ltd को NCLT से मिली बड़ी राहत!

NIIT लिमिटेड ने 16 जून, 2026 को बताया कि उन्हें 22 मई, 2026 के NCLT ऑर्डर की सर्टिफाइड कॉपी मिल गई है। यह ऑर्डर कंपनी की दो सब्सिडियरी कंपनियों - NIIT Institute of Finance Banking & Insurance Training Limited और RPS Consulting Private Limited - के NIIT लिमिटेड में मर्जर को मंजूरी देता है। इस मर्जर की प्रभावी तारीख 1 अप्रैल, 2026 तय की गई है।

क्या हुआ है?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने NIIT लिमिटेड की अपनी दो सब्सिडियरी कंपनियों को पेरेंट कंपनी में मिलाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह कॉर्पोरेट कंसॉलिडेशन को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कदम है।

यह क्यों मायने रखता है?

यह मर्जर NIIT की कॉर्पोरेट संरचना को सुव्यवस्थित करने की रणनीति का हिस्सा है। इससे परिचालन में कुशलता आने और रिपोर्टिंग को सरल बनाने की उम्मीद है। शेयरधारकों के लिए, यह एक अधिक एकीकृत व्यवसाय की ओर कदम है।

पूरी कहानी

इस प्रक्रिया में NIIT Institute of Finance Banking & Insurance Training Limited और RPS Consulting Private Limited का NIIT लिमिटेड में मर्जर शामिल है। NCLT ने 22 मई, 2026 को अपना फैसला सुनाया था, जिसकी सर्टिफाइड कॉपी 16 जून, 2026 को प्राप्त हुई। मर्जर की अपॉइंटेड डेट 1 अप्रैल, 2026 थी।

आगे क्या होगा?

यह मर्जर तब प्रभावी होगा जब सर्टिफाइड ऑर्डर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, हरियाणा के पास फाइल हो जाएगा। दोनों सब्सिडियरी कंपनियों के कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट NIIT लिमिटेड में बिना किसी रुकावट के ट्रांसफर हो जाएंगे। कंपनी अपने बढ़े हुए ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल पर डिफरेंशियल ड्यूटी का भुगतान करने के लिए भी सहमत हो गई है।

जोखिम पर ध्यान दें

हालांकि NCLT की मंजूरी एक प्रक्रियात्मक कदम है, कंपनी ने कुछ पुराने वैधानिक विवादों को स्वीकार किया है। इनमें ₹3.2352 करोड़ का सर्विस टैक्स डिस्प्यूट (2008-2010), ₹0.218 करोड़ का GST लायबिलिटी डिस्प्यूट (2018-2020), और इनकम टैक्स डिस्प्यूट (AY 1999-2006 के लिए ₹0.941 करोड़ और AY 2011-2012 के लिए ₹1.137 करोड़) शामिल हैं। NCLT के ऑर्डर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह मंजूरी कंपनी को टैक्स या अन्य शुल्क का भुगतान करने से छूट नहीं देती है, और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आगे की कार्रवाई कर सकता है।

आगे क्या देखना है

निवेशक मर्जर की प्रभावी तारीख तय करने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अंतिम फाइलिंग का इंतजार करेंगे। साथ ही, ऊपर बताए गए पुराने टैक्स विवादों का समाधान भी देखने लायक होगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.