Muthoot Finance ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी Muthoot Money को खुद में विलय (amalgamate) करने का फैसला किया है। इस कदम से कंपनी का ऑपरेशन्स आसान होगा और **1,006** नई ब्रांच सीधे पैरेंट कंपनी के नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगी।
बिजनेस को मिलेगा नया आधार
Muthoot Finance ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, Muthoot Money Ltd (MML) को अपने में विलय करने की मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया कंपनी एक्ट, 2013 के सेक्शन 230 से 232 के तहत पूरी की जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मर्जर में न तो कोई नकद लेनदेन होगा और न ही कोई नए शेयर जारी किए जाएंगे, जिससे मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस मर्जर का मुख्य उद्देश्य ग्रुप के मैनेजमेंट और प्रशासनिक ढांचे को सरल बनाना है। इससे कंपनी की कार्यक्षमता बढ़ेगी और ऑपरेशनल कॉस्ट में कमी आएगी। मौजूदा समय में, Muthoot Finance के पास पहले से ही 5,000 से ज्यादा ब्रांच हैं और इस विलय के बाद 1,006 और ब्रांच जुड़ने से कंपनी की पकड़ गोल्ड लोन मार्केट में और भी मजबूत हो जाएगी।
फाइनेंशियल डेटा (31 मार्च, 2026 तक)
मर्जर से पहले, Muthoot Money का टर्नओवर ₹1,294.13 करोड़ रहा है और इसकी कुल एसेट्स ₹10,344.92 करोड़ की हैं। वहीं, Muthoot Finance का टर्नओवर ₹27,599.87 करोड़ और कुल एसेट्स ₹1,79,944.55 करोड़ रही है।
आगे की राह
फिलहाल यह योजना शुरुआती दौर में है। इस मर्जर के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) कोच्चि बेंच और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मंजूरी मिलना अनिवार्य है। इसके अलावा, कंपनी को अपने शेयरधारकों और क्रेडिटर्स की सहमति भी लेनी होगी। कंपनी ने कहा है कि वह BSE और NSE को इस बारे में जरूरी जानकारी लगातार अपडेट करती रहेगी।
