Mufin Green Finance ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए ₹75 करोड़ और एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग (ECB) बॉन्ड के जरिए $6 मिलियन जुटाने की मंजूरी दे दी है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने बिजनेस ऑपरेशंस और लिक्विडिटी को मजबूत करने के लिए करेगी।
Mufin Green Finance ने बढ़ाई फंड की तैयारी
Mufin Green Finance Limited ने हाल ही में अपने मैनेजमेंट कमेटी की मीटिंग में यह बड़ा फैसला लिया है। कंपनी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए ₹75 करोड़ और एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग (ECB) बॉन्ड के जरिए $6 मिलियन यानी करीब ₹49.7 करोड़ (लगभग $6 मिलियन के मौजूदा विनिमय दर पर) जुटाएगी। यह पैसा कंपनी के बिजनेस ऑपरेशंस को सपोर्ट करेगा और उसकी लिक्विडिटी (तरलता) को मजबूत करेगा।
NCDs और ECB बॉन्ड की डिटेल्स
कंपनी ₹75 करोड़ के NCDs जारी करेगी, जिसमें ₹25 करोड़ का ग्रीन शू ऑप्शन भी शामिल है। इन NCDs की अवधि 15 महीने की होगी और इन पर 10% का कूपन रेट मिलेगा, जिसका भुगतान हर महीने किया जाएगा।
वहीं, $6 मिलियन के ECB बॉन्ड की अवधि 36 महीने होगी। इन बॉन्ड पर 6M CME SOFR + 450 bps की फ्लोटिंग रेट ब्याज दर लागू होगी, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाएगा।
क्या है इसका मतलब?
यह कदम Mufin Green Finance के लिए काफी अहम है क्योंकि यह कंपनी को फंड जुटाने के लिए नए रास्ते खोलता है। इससे कंपनी अपने वित्तीय संसाधनों को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर पाएगी और अपनी विस्तार योजनाओं को गति दे सकेगी।
जारी किए गए NCDs को BSE Limited पर लिस्ट किया जाएगा, जबकि ECB बॉन्ड को इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज (IFSC) लिमिटेड पर लिस्ट किया जाएगा। दोनों ही इंस्ट्रूमेंट्स सिक्योर हैं, यानी कंपनी की पहचान की गई प्राप्तियों पर इनका पहला और विशेष अधिकार होगा।
जोखिमों पर भी नजर
हालांकि, ECB बॉन्ड पर फ्लोटिंग रेट ब्याज दर का मतलब है कि अगर SOFR दरें बढ़ती हैं, तो कंपनी की ब्याज भुगतान की लागत भी बढ़ सकती है। इसके अलावा, कंपनी को NCDs पर मासिक और ECB बॉन्ड पर अर्ध-वार्षिक ब्याज भुगतान के साथ-साथ मैच्योरिटी पर मूल राशि के भुगतान के लिए पर्याप्त कैश फ्लो बनाए रखना होगा।
