Mufin Green Finance ने डिजिटल-फर्स्ट लेंडिंग मॉडल की ओर रुख करते हुए अपने ऑपरेशनल खर्चों में बड़ी कटौती की है। कंपनी की बॉरोइंग कॉस्ट Q1 FY27 में घटकर **11.17%** रह गई है, जो पिछले साल की समान अवधि में **13.80%** थी।
मुनाफे का नया फॉर्मूला: डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच
कंपनी ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए ब्रांच-आधारित मॉडल से डिजिटल-फर्स्ट ऑपरेशंस पर स्विच किया है। इस रणनीतिक बदलाव का सीधा असर मैनपावर पर पड़ा है, जहां कर्मचारियों की संख्या Q1 FY26 में 499 से घटकर अब 367 रह गई है। मैनेजमेंट का लक्ष्य इसे और घटाकर 300 तक लाने का है।
फंड जुटाने की लागत और ग्रोथ
बॉरोइंग कॉस्ट में 263 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) के लिए एक बड़ा बूस्ट है। कुल उधारी बढ़कर ₹1,551 करोड़ पहुंच गई है, और कंपनी ने अपने लेंडर बेस को भी 20 से बढ़ाकर 35 से ज्यादा लेंडर्स तक फैला लिया है, जिसमें कई PSU बैंक भी शामिल हैं।
क्रेडिट रेटिंग और एसेट क्वालिटी
कंपनी अब अपनी मौजूदा 'A- (Stable)' रेटिंग को अपग्रेड करवाकर 'A' रेटिंग हासिल करने की कोशिश में है। अगर यह प्रयास सफल रहता है, तो कंपनी की कैपिटल कॉस्ट और कम हो जाएगी। इसके अलावा, कंपनी का 'Mediclaim' फाइनेंसिंग पोर्टफोलियो अब ₹677 करोड़ का हो गया है, जो कंपनी को स्थिर रेवेन्यू देने में मदद कर रहा है।
जोखिम और प्रदर्शन पर नजर
कंपनी का ग्रॉस NPA सुधरकर 1.91% (पिछली तिमाही में 1.94%) रहा है। वहीं, डेट-टू-इक्विटी रेशियो में भी सुधार देखा गया है, जो मार्च 2026 में 2.43 गुना हो गया, जबकि मार्च 2025 में यह 2.65 गुना था। हालांकि, निवेशकों को 'Salary Saathi' जैसे नए डिजिटल प्रोडक्ट्स की स्केलेबिलिटी और तेजी से हो रही छंटनी के बाद ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बनाए रखने पर नजर रखनी होगी।
