Mihika Industries ने ₹90 करोड़ के राइट्स इश्यू (Rights Issue) और ₹50 करोड़ के रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (Related Party Transaction) की घोषणा की है। हालांकि, कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर डॉक्यूमेंटेशन गैप्स, इंटरनल कंट्रोल में कमजोरी और SEBI के नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है।
Mihika Industries: ऑडिट की चिंताओं के बीच ₹90 करोड़ राइट्स इश्यू का ऐलान!
Mihika Industries ने लगभग ₹90 करोड़ का राइट्स इश्यू लाने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, कंपनी प्रमोटर एंटिटी M/s. Veggie Fest Foods Private Limited के साथ ₹50 करोड़ तक के मटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (Related Party Transaction) के लिए शेयरहोल्डर की मंजूरी मांगेगी। यह सब तब हो रहा है जब कंपनी के ऑडिटर ने FY26 के लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है।
क्या है माजरा?
Mihika Industries ने ₹90 करोड़ तक का राइट्स इश्यू लाने का प्रस्ताव दिया है। बोर्ड ने प्रमोटर एंटिटी M/s. Veggie Fest Foods Private Limited के साथ फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹50 करोड़ तक के रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के लिए शेयरधारकों से मंजूरी लेने को भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, कंपनी अपना रजिस्टर्ड ऑफिस पश्चिम बंगाल से गुजरात शिफ्ट करने की भी योजना बना रही है।
क्यों है ये अहम?
कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस में भारी गिरावट देखी गई है। FY26 में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 92.29% घटकर सिर्फ ₹2.68 करोड़ रह गया, जबकि FY25 में यह ₹34.74 करोड़ था। हालांकि, नेट प्रॉफिट 57.88% बढ़कर ₹8.62 लाख हो गया, और बेसिक ईपीएस (EPS) ₹0.09 तक पहुँच गया। लेकिन, इन नतीजों पर ऑडिटर की 'क्वालिफाइड ओपिनियन' भारी पड़ रही है। ऑडिटर ने ट्रेड रिसीवेबल्स और पेएबल्स के लिए डॉक्यूमेंटेशन में कमी, इन्वेंटरी वैल्यूएशन के सपोर्ट का अभाव, FY26 के लिए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति न करना, और अपर्याप्त IT और इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स जैसे मुद्दों को उजागर किया है।
कंपनी की पिछली स्थिति
FY26 में, Mihika Industries ने ₹2.68 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस और ₹0.09 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। यह FY25 के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है, जब रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस ₹34.74 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹0.05 करोड़ था।
आगे क्या होगा?
कंपनी अब राइट्स इश्यू और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के लिए शेयरधारकों की मंजूरी का इंतजार कर रही है। रजिस्टर्ड ऑफिस को गुजरात शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी शेयरहोल्डर की मंजूरी पर निर्भर है। निवेशकों की निगाहें इस बात पर होंगी कि कंपनी ऑडिटर की चिंताओं और SEBI रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंस (SEBI Regulatory Non-Compliance) को कैसे दूर करती है।
जोखिम क्या हैं?
मुख्य जोखिमों में रेवेन्यू में गंभीर गिरावट, 'क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन' के मायने (जो फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और इंटरनल कंट्रोल्स में संभावित कमजोरियों का संकेत देता है), और बड़ा रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन शामिल है, जो कंपनी के FY26 के टर्नओवर का 1,800% से भी अधिक है। SEBI LODR रेगुलेशंस के कई उल्लंघन भी गवर्नेंस के लिए एक बड़ा जोखिम पेश करते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को कंपनी द्वारा ऑडिट क्वालिफिकेशन्स को दूर करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों, राइट्स इश्यू और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के लिए शेयरहोल्डर की मंजूरी हासिल करने की क्षमता, और SEBI नियमों के अनुपालन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इंटरनल ऑडिट फंक्शन और फाइनेंशियल कंट्रोल्स की प्रभावशीलता महत्वपूर्ण होगी।
