Microse India Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए निराशाजनक नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा घाटे में बदल गया है और रेगुलेटरी अनुपालन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
बिगड़े फाइनेंशियल हालात
Microse India Ltd के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट जो पिछले साल ₹0.96 करोड़ था, वह अब गिरकर ₹1.72 करोड़ के घाटे में तब्दील हो गया है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी की टोटल इनकम भी नेगेटिव होकर ₹1.18 करोड़ रही है, जबकि पिछले साल यह ₹1.36 करोड़ थी।
रेगुलेटरी और कंप्लायंस पर सवाल
सिर्फ खराब नतीजे ही नहीं, बल्कि कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
- NBFC स्टेटस का संकट: कंपनी का NBFC रजिस्ट्रेशन RBI की वेबसाइट पर 'Not Traceable' (नॉट ट्रेसेबल) दिखाई दे रहा है, जो निवेशकों के लिए बड़ा रेड फ्लैग है।
- भारी पेनल्टी: फाइनेंशियल रिजल्ट्स फाइल करने में देरी के कारण कंपनी को जनवरी 2026 में BSE को ₹2.71 लाख का जुर्माना देना पड़ा था।
- ऑडिटर्स की चिंता: सांख्यिकीय ऑडिटर्स ने NBFC के लिए अनिवार्य फाइनेंशियल रिपोर्टिंग फॉर्मेट के उल्लंघन पर आपत्ति जताई है।
आगे क्या होगा?
कंपनी की 38वीं एनुअल जनरल मीटिंग 29 सितंबर, 2026 को तय की गई है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि मैनेजमेंट अपनी संदिग्ध NBFC रजिस्ट्रेशन स्थिति और ऑडिटर्स द्वारा उठाए गए सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है। कंपनी ने इस बार किसी भी तरह का डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है, जो उसकी कमजोर फाइनेंशियल सेहत को दर्शाता है।
