McLeod Russel India ने अपने भारी-भरकम **₹2,483.31 करोड़** के कर्ज को सुलझाने के लिए NARCL के साथ एक मास्टर रिस्ट्रक्चरिंग एग्रीमेंट (MRA) साइन किया है।
कर्ज का बंटवारा और नई रणनीति
कंपनी ने अपने कुल ₹2,483.31 करोड़ के कर्ज को दो हिस्सों में बांटा है। इसमें से ₹1,050 करोड़ को 'सस्टेनेबल' (Sustainable) कर्ज माना गया है, जिसे FY2029 तक चुकाना होगा। बाकी का ₹1,433.31 करोड़ हिस्सा 'अनसस्टेनेबल' (Unsustainable) के तहत प्रबंधित किया जाएगा।
निवेशकों पर असर (Equity Dilution)
इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त लेंडर को 10% इक्विटी अलॉटमेंट देना है। इसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारकों के लिए इक्विटी का डाइल्यूशन होगा। साथ ही, लेंडर को कंपनी के बोर्ड में एक नॉमिनी डायरेक्टर नियुक्त करने का अधिकार मिलेगा और कामकाज पर नज़र रखने के लिए एक 'मॉनिटरिंग कमेटी' भी बनाई जाएगी।
आगे की राह
ऑपरेशनल स्तर पर अब कंपनी का पूरा ध्यान FY2029 के रीपेमेंट शेड्यूल को पूरा करने पर होगा। प्रमोटर्स को भी अपनी होल्डिंग गिरवी रखनी होगी। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनी तय समय पर अपना कर्ज चुका पाती है और बोर्ड में लेंडर का बढ़ता हस्तक्षेप भविष्य के फैसलों को कैसे प्रभावित करेगा।
