Mantra Capital ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शानदार आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹25 करोड़ से उछलकर ₹110 करोड़ के पार पहुंच गया है। कंपनी अब अपने सिक्योर बिजनेस लोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल फाइनेंसिंग के दायरे को 4 राज्यों की 20 ब्रांचों तक बढ़ा रही है।
मुनाफे और ग्रोथ का गणित
42वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के दौरान कंपनी ने अपनी ग्रोथ का रोडमैप साझा किया। केवल 18 महीने के ऑपरेशनल कार्यकाल में कंपनी ने शून्य से ₹110 करोड़ का AUM हासिल कर एक बड़ा माइलस्टोन पार किया है। इस दौरान कुल डिस्बर्समेंट (Disbursement) ₹96 करोड़ रहा, जो कंपनी की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की टोटल इनकम ₹16.35 करोड़ रही।
रिस्क मैनेजमेंट और एसेट क्वालिटी
कंपनी के लोन बुक का प्रदर्शन देखें तो 94.4% की कलेक्शन एफिशिएंसी इसकी अंडरराइटिंग अनुशासन को साबित करती है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की नेट वर्थ ₹27.25 करोड़ रही। वहीं, ग्रॉस NPA 2.03% और नेट NPA 1.25% पर स्थिर है, जो कि 21% से 22% की ब्याज दरों पर कर्ज बांटने वाली कंपनी के लिए एक संतुलित आंकड़ा है।
आगे की चुनौतियां और रणनीति
कंपनी फिलहाल दो मोर्चों पर काम कर रही है: पहला, टियर-2 और टियर-3 शहरों में सिक्योर बिजनेस लोन बांटना और दूसरा, दिल्ली-NCR जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के फाइनेंसिंग मार्केट में अपनी पैठ बनाना।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे कंपनी का दायरा बढ़ेगा, क्रेडिट रिस्क को मैनेज करना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, कम लागत वाली फंडिंग (Funding) जुटाना कंपनी के लॉन्ग-टर्म मुनाफे के लिए सबसे जरूरी कदम साबित होगा। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनी की लोन बुक की क्वालिटी और नई फंडिंग सोर्स पर नजर रखनी चाहिए।
