Manipal Finance Corporation Ltd की 43वीं सालाना आम बैठक (AGM) में कंपनी के वित्तीय हालात पर गंभीर सवाल उठे हैं। कंपनी का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले घटकर सिर्फ **₹18.59 लाख** रह गया है, जबकि पिछले साल यह **₹723.71 लाख** था।
मुनाफे में बड़ी गिरावट
कंपनी की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी की कुल आय घटकर ₹19.85 लाख रही, जो पिछले साल ₹22.35 लाख थी। सबसे चिंताजनक बात प्रॉफिट बिफोर टैक्स में आई गिरावट है, जो ₹723.71 लाख से गिरकर महज ₹18.59 लाख पर आ गया है।
ऑडिटर्स की चेतावनी (Auditor's Concerns)
कंपनी के ऑडिटर्स ने 'Basis for Qualified Opinion' जारी करते हुए कंपनी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुख्य चिंताओं में शामिल हैं:
- कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' यानी निरंतर चलने की क्षमता पर संशय।
- भारी एक्युम्युलेटेड लॉस (accumulated losses) और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) में फंसी रकम।
- कंपनी का अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर रेगुलेटरी मानकों के अनुसार 'ऑडिट ट्रेल' या 'एडिट लॉग' फीचर से लैस नहीं है।
बैकग्राउंड और जोखिम
याद रखें कि Manipal Finance साल 2002 के बाद से एक ट्रेडिशनल NBFC के तौर पर काम नहीं कर रही है। दिसंबर 2004 में ही RBI ने इनका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया था। अब कंपनी का काम सिर्फ पुरानी देनदारियों (legacy liabilities) को निपटाना और बकाया वसूली करना है। कंपनी अब कोई नया लोन नहीं दे रही है, जिससे शेयरधारकों के लिए जोखिम का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है।
