Manba Finance की हालिया EGM में निवेशकों ने कंपनी के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 19 अक्टूबर, 2026 को हुई मीटिंग में सात अहम प्रस्तावों को लगभग सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई है, जिसमें प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए पूंजी जुटाना शामिल है।
बड़े फैसलों पर लगी मुहर
19 अक्टूबर, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित इस एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में सभी 7 एजेंडा आइटम्स पर 100% या उसके करीब वोटिंग हुई। इस मीटिंग की निगरानी डॉ. रोनक झूठावत ने की और इसमें रिमोट ई-वोटिंग के जरिए निवेशकों ने अपना मत दिया।
क्यों अहम है यह फैसला?
शेयरधारकों द्वारा इन प्रस्तावों को पारित करना कंपनी की रणनीति के प्रति उनके भरोसे को दिखाता है। ऑथोराइज्ड शेयर कैपिटल बढ़ाने और वारंट्स व इक्विटी शेयर जारी करने की अनुमति मिलने से कंपनी के पास अपना फाइनेंशियल बेस मजबूत करने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, मैनेजमेंट टीम की पुनर्नियुक्ति यह सुनिश्चित करती है कि कंपनी के विकास के अगले चरण में लीडरशिप स्थिर बनी रहे।
प्रमुख प्रस्तावों पर एक नजर
- कैपिटल एक्सपेंशन: अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने और मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में बदलाव को मंजूरी।
- रणनीतिक फंडिंग: फुली कन्वर्टिबल वारंट्स और इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल इश्यू के लिए अनुमति।
- गवर्नेंस और लीडरशिप: नीलम टाटर को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में दोबारा चुना गया। साथ ही, मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष कीर्ति कुमार शाह और अन्य होल-टाइम डायरेक्टर्स जैसे मोनील मनीष शाह, निकिता मनीष शाह और जय मोटा की पुनर्नियुक्ति और उनके वेतन में संशोधन को हरी झंडी दी गई।
आगे क्या देखना होगा?
अब निवेशकों की नजर रेगुलेटरी फाइलिंग्स पर होनी चाहिए, जहां प्रेफरेंशियल इश्यू के लिए टाइमलाइन और प्राइसिंग की जानकारी सामने आएगी। इसके अलावा, संशोधित वेतन ढांचे का कंपनी की लागत (Cost Base) पर क्या असर पड़ेगा, इस पर भी बारीकी से नजर रखना जरूरी होगा।
