Mahan Industries शेयरधारकों से ₹29.82 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के लिए मंजूरी मांगेगी। इस कदम से कंपनी की कैपिटल बेस मजबूत होगी और रेगुलेटरी रेश्यो बने रहेंगे, लेकिन कंपनी का कंट्रोल बदलने वाला है, जिससे एक अनिवार्य ओपन ऑफर (Open Offer) शुरू होगा।
Mahan Industries की नई चाल
Mahan Industries लिमिटेड ₹29.82 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए कंपनी 32,00,000 इक्विटी शेयर ₹12 प्रति शेयर के भाव पर जारी करेगी, जिससे ₹3.84 करोड़ की राशि आएगी। साथ ही, 2,16,55,216 फुली कन्वर्टिबल वारंट भी ₹12 प्रति वारंट के भाव पर जारी किए जाएंगे, जिनसे ₹25.98 करोड़ जुटेंगे।
क्यों जरूरी है ये कदम?
इस प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के बाद कंपनी के कंट्रोल में बड़ा बदलाव आएगा। यही वजह है कि प्रमोटर्स ने SEBI के नियमों के तहत एक अनिवार्य ओपन ऑफर की घोषणा की है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी कैपिटल बेस बढ़ाने, नेट ओनड फंड (NOF) को मजबूत करने और कैपिटल टू रिस्क (वेटेड) एसेट्स रेशियो (CRAR) को बनाए रखने के लिए करेगी।
आगे क्या?
शेयरधारकों की मंजूरी के लिए 15 अगस्त, 2026 को एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई गई है। कंपनी ने 16 जुलाई, 2026 को ओपन ऑफर की पब्लिक अनाउंसमेंट भी कर दी है।
निवेशकों पर असर
इस इश्यू और ओपन ऑफर से कंपनी की ओनरशिप स्ट्रक्चर और कंट्रोल में बड़ा फेरबदल होगा। मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम (Dilution) हो जाएगी। वारंट होल्डर्स के पास अलॉटमेंट के 18 महीने के अंदर इन्हें इक्विटी में बदलने का विकल्प होगा, वरना भुगतान की गई राशि जब्त हो सकती है।
जोखिम
- डाइल्यूशन: नए शेयर्स और वारंट्स से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम होगी।
- ओपन ऑफर: निवेशकों को ओपन ऑफर की डिटेल्स और नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
- वारंट लैप्स: वारंट्स को समय पर एक्सरसाइज न करने पर राशि जब्त होने का खतरा है।
