इंडिया रेटिंग्स ने MTNL के ₹175.71 अरब के NCDs की रेटिंग को 'IND AAA(CE)' पर बरकरार रखा है, लेकिन इसे 'Watch with Negative Implications' में रखा गया है। कंपनी की कमजोर फाइनेंशियल्स और ऑपरेशनल दिक्कतें इसकी मुख्य वजह हैं, भले ही सरकार की गारंटी मौजूद हो।
MTNL के क्रेडिट रेटिंग पर बड़ा अपडेट
इंडिया रेटिंग्स ने महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) के ₹175.71 अरब के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) की रेटिंग को 'IND AAA(CE)' पर स्थिर रखा है। हालांकि, इस रेटिंग को 'Watch with Negative Implications' यानी नकारात्मक संकेत के साथ निगरानी में रखा गया है।
क्या है खास?
यह रेटिंग भारत सरकार (GoI) द्वारा दी गई प्री-डिफॉल्ट गारंटी की मजबूती को दिखाती है। लेकिन, यह MTNL की अंदरूनी फाइनेंशियल और ऑपरेशनल चुनौतियों को भी उजागर करती है। 'Negative Implications' वॉच का मतलब है कि अगर मौजूदा दबावों को दूर नहीं किया गया, तो रेटिंग में कटौती हो सकती है।
क्यों अहम है ये?
MTNL लंबे समय से फाइनेंशियल कमजोरी और ऑपरेशनल दिक्कतों से जूझ रहा है। बैंक इसे पहले ही NPA घोषित कर चुके हैं। सरकारी गारंटी के बावजूद, ऐसे मौके आए हैं जब फंड मिलने में देरी के कारण गारंटी का इस्तेमाल करना पड़ा है।
आगे क्या?
NCD रेटिंग में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन 'Watch Negative' स्थिति का मतलब है कि इंडिया रेटिंग्स अगले छह महीनों तक MTNL के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और पेमेंट मैकेनिज्म के पालन पर करीब से नजर रखेगी। लगातार फंडिंग की पुष्टि और पेमेंट शेड्यूल का पालन ही रेटिंग को स्थिर करने में अहम भूमिका निभाएगा।
मुख्य जोखिम
सबसे बड़े जोखिमों में कर्ज चुकाने के लिए MTNL के पर्याप्त कैश फ्लो की कमी, फंड को ट्रस्ट और रिटेंशन अकाउंट में जमा करने में बार-बार होने वाली देरी, और बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण ऑपरेटिंग लॉस शामिल हैं। कंपनी की अपनी नकदी की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
तुलना
MTNL एक बेहद प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम बाजार में काम करता है। जहां इसकी रेटिंग को सरकारी समर्थन का फायदा मिलता है, वहीं इसका स्टैंडअलोन फाइनेंशियल परफॉरमेंस प्राइवेट सेक्टर के साथियों जैसे रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से काफी पीछे है, जो लगातार मुनाफा कमा रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं।
अहम आंकड़े
- FY26 (रेस्टेटेड) में रेवेन्यू घटकर ₹9.6 अरब रह गया, जो FY25 में ₹11.3 अरब था।
- FY26 में EBITDA नेगेटिव ₹-1.4 अरब रहा (FY25: ₹-0.2 अरब)।
- FY26 में ग्रॉस डेट ₹354.4 अरब था (FY25: ₹326.6 अरब)।
- ब्याज का खर्च FY26 में ₹29.8 अरब रहा (FY25: ₹29.2 अरब)।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को सरकारी सहायता तंत्र, NCDs के लिए स्ट्रक्चर्ड पेमेंट मैकेनिज्म के पालन, और MTNL के ऑपरेशनल परफॉरमेंस और फाइनेंशियल हेल्थ में सुधार के किसी भी संकेत पर नजर रखनी चाहिए। एस्क्रो अकाउंट की फंडिंग में किसी भी अतिरिक्त देरी से रेटिंग में कटौती हो सकती है।
